महाअष्टमी-नवमी की पूजा 19 अक्टूबर को एक ही दिन: 20 को मनेगा विजयादशमी पर्व

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The 29th grand Bhagwati Jagran will be held on the occasion of the Maa Vaishno Devi Temple's foundation day
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जयपुर। शारदीय नवरात्र में इस बार महा अष्टमी और महानवमी की पूजा 19 अक्टूबर को एक ही दिन होगी। अष्टमी तिथि सुबह 10:51 बजे तक रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी, जो शाम तक रहेगी। तिथि के इस संयोग के चलते श्रद्धालु एक ही दिन मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की आराधना करेंगे। इसी दिन कन्या पूजन, हवन और नवरात्र के अनुष्ठानों की पूर्णाहुति होगी। नौ दिन तक व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना, कन्या पूजन और हवन के बाद व्रत का पारण करेंगे।

पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि महानवमी पर दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के साथ हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। अष्टमी और नवमी के संधिकाल में संधि पूजा का विशेष महत्व है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। कन्या पूजन की परंपरा के तहत छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण पखारे जाएंगे, चुनरी ओढ़ाई जाएगी और हलवा, पूरी व चने का प्रसाद खिलाया जाएगा। इसके बाद दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां महागौरी शांति, पवित्रता और सुख-समृद्धि की प्रतीक हैं, जबकि मां सिद्धिदात्री की आराधना सिद्धियों और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए की जाती है।

20 अक्टूबर को मनेगी विजयादशमी:

नवरात्रि के बाद 20 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। दशहरे पर शस्त्र और वाहन पूजन किया जाएगा। शाम को विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक आयोजनों के बीच रावण के पुतले का दहन होगा।

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