अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को, चार शुभ योगों का संयोग

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जयपुर। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाए जाने वाले इस पर्व को कालाष्टमी और कराष्टमी भी कहा जाता है। इस बार व्रत पर रवि योग, पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और राजयोग का संयोग बताया गया है।

आचार्य गौरी शंकर शर्मा बोरखेड़ा ने बताया कि अहोई अष्टमी पर दीवार या किसी स्वच्छ स्थान पर अहोई माता और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाया या स्थापित किया जाता है। पूजन में रोली, चावल, पुष्प, दूध तथा हलवा-पूरी या पुए का भोग अर्पित किया जाता है। मुख्य पूजन गोधूलि बेला या सूर्यास्त के बाद किया जाता है।

उन्होंने बताया कि व्रत सूर्योदय से शुरू होता है। महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार रहकर व्रत करती हैं। शाम को अहोई माता की पूजा और कथा सुनने के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

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