‘श्री जन’ वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट और वैदिक कन्या पीजी महाविद्यालय की पहल

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जयपुर। 21वीं सदी में बेहतर जीवन की तलाश, बदलती जीवनशैली की चुनौतियों और स्वस्थ समाज के निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा के लिए राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में ‘श्री जन ’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। वैदिक कन्या पीजी महाविद्यालय और वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट, जयपुर की ओर से आयोजित इस सम्मेलन की थीम “द परसूट ऑफ़ वेल-बीइंग इन द 21st सेंचुरी: चैलेंजेज, चोइसस एंड पॉसिबिलिटीज” रही।

सम्मेलन में श्री ए.टी. श्रीनिवासन, डॉ पंकज जोशी और श्री मुकेश मिश्रा ने बताया की शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, पोषण, पर्यावरण, आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों पर ये आयोजन किया गया है।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अश्वनी भगत, आईएइस, पं. सुरेश मिश्रा, संस्थापक अध्यक्ष, संस्कृति युवा संस्था, मृदुला सामवेदी, समाजसेवी एवं परोपकारी, रवि नैय्यर, भाजपा प्रत्याशी और एच.सी. गनेशिया सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

तकनीक और एआई से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक पर चर्चा

‘टेक्नोलॉजी, एआई एंड फ्यूचर ऑफ वेलबीइंग’ सत्र में महर्षि अरविंद विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन संजय पाराशर, पोद्दार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरपर्सन डॉ. आनंद पोद्दार ने विचार रखे। सत्र का संचालन विद्या एंड शिक्षा समिति के अध्यक्ष ए.टी. श्रीनिवासन ने किया। चर्चा में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय जीवन की गुणवत्ता तथा भविष्य की चुनौतियों पर विचार किया गया।

ए.टी. श्रीनिवासन ने कहा, “21वीं सदी में वेलबीइंग को केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शिक्षा, तकनीक, मानसिक मजबूती और जीवन में संतुलन का समन्वय जरूरी है। श्रिजन जैसे मंच लोगों को बेहतर विकल्प चुनने और अधिक स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की दिशा में प्रेरित करते हैं।”

‘फूड, न्यूट्रिशन, लॉन्गेविटी एंड हेल्दी एजिंग’ सत्र में डॉ. पंकज वर्शनेय, डॉ. आलोक तिवारी, डॉ. राकेश शर्मा ने पोषण, जीवनशैली और स्वस्थ वृद्धावस्था के महत्व पर चर्चा की। सत्र का संचालन डॉ. सुमित तिवारी ने किया। वक्ताओं ने दीर्घायु के साथ स्वस्थ जीवन जीने के लिए संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य देखभाल की भूमिका पर जोर दिया।

‘एनवायरनमेंट, वेलबीइंग एंड होलिस्टिक लिविंग’ सत्र में डॉ. सुनील धांध, योगाचार्य धाकराम, डॉ. सुंदीप जैन, डॉ. राकेश कालरा और श्री पंकज जोशी ने पर्यावरण, योग और समग्र जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। सत्र का संचालन डॉ. प्रमिला संजया ने किया।

आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य को बताया जरूरी

‘द आर्ट ऑफ लिविंग: पर्पज, स्पिरिचुअलिटी एंड ह्यूमन फ्लोरिशिंग’ सत्र में श्री संदीप तिवारी, महंत दीपक वल्लभ, प्रो. सुनीता श्रीमाली, डॉ. लता श्रीमाली और प्रवीण पांडेय ने जीवन के उद्देश्य, आध्यात्मिकता और आंतरिक संतुलन पर विचार साझा किए। सत्र का संचालन डॉ. आचार्य राजेश्वरी ने किया।

वहीं, ‘मेंटल वेलबीइंग इन एन एज ऑफ एंग्जायटी’ सत्र में जस्सी छाबड़ा, डॉ. पंकज दवे, श्री मनोज कुमार शर्मा, डॉ. राजकुमार राजपाल और डॉ. राजवीर आर्य ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। सत्र का संचालन श्री ए.टी. श्रीनिवासन ने किया। वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवाद और समय पर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. पंकज जोशी ने कहा, “स्वस्थ वृद्धावस्था की शुरुआत हमारी रोजमर्रा की आदतों से होती है। संतुलित पोषण, समय पर स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली न केवल दीर्घायु में सहायक हैं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं। लक्ष्य केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन होना चाहिए।”

आईआईईएमआर के निदेशक मुकेश मिश्रा ने कहा, “वेलबीइंग व्यक्ति, संस्थान और समाज की साझा जिम्मेदारी है। श्रिजन जैसे सम्मेलन विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान, नवाचार और आधुनिक जीवन की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशने का अवसर प्रदान करते हैं।”

सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने इस बात को रेखांकित किया कि बेहतर जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन, पोषण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी आवश्यक हैं।य सम्मेलन का आयोजन किया गया। वैदिक कन्या पीजी महाविद्यालय और वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट, जयपुर की ओर से आयोजित इस सम्मेलन की थीम “द परसूट ऑफ़ वेल-बीइंग इन द 21st सेंचुरी: चैलेंजेज, चोइसस एंड पॉसिबिलिटीज” रही। सम्मेलन में श्री ए.टी. श्रीनिवासन, डॉ पंकज जोशी और श्री मुकेश मिश्रा ने बताया की शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, पोषण, पर्यावरण, आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों पर ये आयोजन किया गया है।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अश्वनी भगत, आईएइस, पं. सुरेश मिश्रा, संस्थापक अध्यक्ष, संस्कृति युवा संस्था, मृदुला सामवेदी, समाजसेवी एवं परोपकारी, रवि नैय्यर, भाजपा प्रत्याशी और एच.सी. गनेशिया सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

तकनीक और एआई से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक पर चर्चा

‘टेक्नोलॉजी, एआई एंड फ्यूचर ऑफ वेलबीइंग’ सत्र में महर्षि अरविंद विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन संजय पाराशर, पोद्दार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरपर्सन डॉ. आनंद पोद्दार ने विचार रखे। सत्र का संचालन विद्या एंड शिक्षा समिति के अध्यक्ष ए.टी. श्रीनिवासन ने किया। चर्चा में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय जीवन की गुणवत्ता तथा भविष्य की चुनौतियों पर विचार किया गया।

ए.टी. श्रीनिवासन ने कहा, “21वीं सदी में वेलबीइंग को केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शिक्षा, तकनीक, मानसिक मजबूती और जीवन में संतुलन का समन्वय जरूरी है। श्रिजन जैसे मंच लोगों को बेहतर विकल्प चुनने और अधिक स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की दिशा में प्रेरित करते हैं।”

‘फूड, न्यूट्रिशन, लॉन्गेविटी एंड हेल्दी एजिंग’ सत्र में डॉ. पंकज वर्शनेय, डॉ. आलोक तिवारी, डॉ. राकेश शर्मा ने पोषण, जीवनशैली और स्वस्थ वृद्धावस्था के महत्व पर चर्चा की। सत्र का संचालन डॉ. सुमित तिवारी ने किया। वक्ताओं ने दीर्घायु के साथ स्वस्थ जीवन जीने के लिए संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य देखभाल की भूमिका पर जोर दिया।

‘एनवायरनमेंट, वेलबीइंग एंड होलिस्टिक लिविंग’ सत्र में डॉ. सुनील धांध, योगाचार्य धाकराम, डॉ. सुंदीप जैन, डॉ. राकेश कालरा और श्री पंकज जोशी ने पर्यावरण, योग और समग्र जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। सत्र का संचालन डॉ. प्रमिला संजया ने किया।

आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य को बताया जरूरी

‘द आर्ट ऑफ लिविंग: पर्पज, स्पिरिचुअलिटी एंड ह्यूमन फ्लोरिशिंग’ सत्र में संदीप तिवारी, महंत दीपक वल्लभ, प्रो. सुनीता श्रीमाली, डॉ. लता श्रीमाली और प्रवीण पांडेय ने जीवन के उद्देश्य, आध्यात्मिकता और आंतरिक संतुलन पर विचार साझा किए। सत्र का संचालन डॉ. आचार्य राजेश्वरी ने किया।

वहीं, ‘मेंटल वेलबीइंग इन एन एज ऑफ एंग्जायटी’ सत्र में जस्सी छाबड़ा, डॉ. पंकज दवे, मनोज कुमार शर्मा, डॉ. राजकुमार राजपाल और डॉ. राजवीर आर्य ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। सत्र का संचालन ए.टी. श्रीनिवासन ने किया। वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवाद और समय पर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. पंकज जोशी ने कहा, “स्वस्थ वृद्धावस्था की शुरुआत हमारी रोजमर्रा की आदतों से होती है। संतुलित पोषण, समय पर स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली न केवल दीर्घायु में सहायक हैं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं। लक्ष्य केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन होना चाहिए।”

वर्ल्ड हेल्थ एंड वेलनेस फेस्ट के को-फाउंडर मुकेश मिश्रा ने कहा, “वेलबीइंग व्यक्ति, संस्थान और समाज की साझा जिम्मेदारी है। श्रिजन जैसे सम्मेलन विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान, नवाचार और आधुनिक जीवन की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशने का अवसर प्रदान करते हैं।”

सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने इस बात को रेखांकित किया कि बेहतर जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन, पोषण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी आवश्यक हैं।

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