जयपुर। चैत्र शुक्ल पंचमी सोमवार को लक्ष्मी पंचमी (श्री पंचमी) श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों में धनदात्री माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की गई। श्रीयंत्र की विशेष अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और आर्थिक उन्नति की कामना की।
लक्ष्मी पंचमी पर कृतिका नक्षत्र, विष्कुंभ योग और रात्रि में सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग रहा जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने मां लक्ष्मी की आराधना की। श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्नयै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्…मंत्र के साथ श्रद्धालुओं ने पीली सरसो से हवन में आहुतियां प्रदान की।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार शुभ, चर, लाभ और अमृत के संयोग ने इस पर्व की महत्ता को और बढा दी। इसी के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने इस दिन को शुभ मानकर नए वस्त्र, आभूषण, बर्तन और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी की।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित मंदिरों एवं घरों में श्रीयंत्र की विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से श्रीयंत्र की स्थापना कर श्रीसूक्त एवं लक्ष्मी मंत्रों का जप किया। मान्यता है कि श्रीयंत्र की आराधना से मां लक्ष्मी और भगवती ललिता त्रिपुर सुंदरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा घर-परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीयंत्र को ‘यंत्रराज’ और ‘देवद्वार’ कहा गया है, जो शिव और शक्ति का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। इस दिन घर, दुकान या नए भवन की नींव में प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र स्थापित करने से स्थायी समृद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
वहीं तिजोरी या पूजा स्थल में श्रीयंत्र स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना करने से आर्थिक संकट दूर होने की मान्यता है। गौरतलब है कि दक्षिण भारत में लक्ष्मी पंचमी को दीपावली की तर्ज पर विशेष रूप से मनाया जाता है, और इसी परंपरा की हल्की सी झलक जयपुर में भी देखने को मिली। लक्ष्मी माता के मंदिरों में विशेष आयोजन हुए।




















