भ्रष्टाचार पर एसीबी का शिकंजा: तीन माह में 149 आरोपी गिरफ्तार

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जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) राजस्थान राज्य के विभिन्न विभागों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। पिछली तिमाही में ब्यूरो ने कई बड़े मामलों का खुलासा करते हुए बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

एसीबी महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता के अनुसार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पंचायती राज विभाग, नगर निगम, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन से जुड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए कई प्रकरण दर्ज किए गए। इस दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में व्यापक जांच और ट्रैप कार्रवाई की गई।

आंकड़ों के अनुसार पिछली तिमाही में एसीबी ने कुल 111 प्रकरण दर्ज कर 149 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें 68 ट्रैप कार्रवाई, 19 रिश्वत मांग के मामले, 8 आय से अधिक संपत्ति और 16 पद के दुरुपयोग से जुड़े प्रकरण शामिल हैं।

एसीबी महानिदेशक के अनुसार 8 जनवरी 2026 को परिवहन विभाग से जुड़े प्रकरण में अधिकारियों-कर्मचारियों और निजी दलालों के 11 ठिकानों पर आकस्मिक तलाशी ली गई।

9 जनवरी को झालावाड़ में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता विष्णु चंद गोयल को 84 हजार रुपये कीमत का आईफोन रिश्वत में लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

13 फरवरी को पंचायती राज विभाग के कनिष्ठ सहायक शुभकरण परिहार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में पांच ठिकानों पर सर्च की कार्रवाई की गई, जिसमें भारी नकदी, जेवरात और अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ।
16 फरवरी को नगर निगम जयपुर की पशु प्रबंधन शाखा में संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र सिंह को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।

यह राशि पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश शर्मा और डॉ. राकेश कलोरिया के लिए ली जा रही थी। इसके अलावा 17 फरवरी को जल जीवन मिशन मामले में एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया।

एसीबी ने इससे पहले 20 दिसंबर 2025 को अजमेर इकाई की कार्रवाई में हरियाणा के सिरसा साइबर क्राइम थाने के उप निरीक्षक सुरेंद्र कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों को छह लाख रुपये की संदिग्ध रिश्वत राशि के साथ पकड़ा था। वहीं 15 दिसंबर 2025 को भीलवाड़ा में एक मेडिकल अधिकारी को 11 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।

एसीबी का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। ब्यूरो पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रहा है।

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