जयपुर। राजधानी सहित आसपास के क्षेत्रों में शीतला अष्टमी बुधवार को श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाई जाएगी। शीतला अष्टमी के अवसर पर चाकसू स्थित शील की डूंगरी मंदिर, नायला और चंदलाई सहित कई स्थानों पर मेले लगेंगे। श्रद्धालु सुबह शीतला माता को शीतल व्यंजनों का भोग अर्पित कर परंपरा के अनुसार ठंडा भोजन ग्रहण करेंगे।
इससे एक दिन पहले मंगलवार को ‘रांधा पुआ’ के अवसर पर महिलाओं ने दिनभर पकवान बनाने की तैयारियां कीं। शीतला माता के भोग के लिए कांजी बड़ा, मोहनथाल, गुंजिया, पेठे, सकरपारे, पूड़ी, पापड़ी, हलुआ, राबड़ी और घाट सहित कई प्रकार के व्यंजन बनाए गए।
रांधा पुआ के दिन भोग और पूजन सामग्री की खरीदारी को लेकर शहर के बाजारों में सुबह से ही रौनक रही। जगह-जगह फुटपाथों पर मटके, कलश और सराई की दुकानें सजी नजर आईं। परंपरा के अनुसार शीतला अष्टमी के दिन अधिकांश घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और लोग ठंडा भोजन ही ग्रहण करते हैं। कई लोग ठंडे पानी से स्नान करते हैं और चाय-कॉफी भी नहीं पीते।
महिलाएं तड़के गीत गाते हुए शीतला माता के मंदिरों में भोग लगाकर पत्थवारी पूजन करेंगी। मान्यता है कि माता की पूजा और शीतल भोजन करने से शीतला जनित रोगों का प्रकोप कम होता है।
चाकसू स्थित शील की डूंगरी में लगने वाले मेले में जयपुर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। प्रशासन ने मेले को लेकर साफ-सफाई, बैरिकेडिंग और रोशनी की व्यवस्था पूरी कर ली है। मेले में करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं नायला और चंदलाई में भी शीतला माता के मेले आयोजित होंगे।




















