जयपुर। मोक्षदा एकादशी के साथ ही सोमवार को गीता जयंती और जैन समाज की मौन एकादशी का शहर भर में आयोजन होगा। इस दिन भगवान शिव और विष्णु की कृपा भक्तों पर बरसेगी। श्रद्धालु व्रत, उपवास और ध्यान करेंगे। मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी और धार्मिक उत्साह का माहौल बनेगा।
एकादशी के अवसर पर शहर के प्रमुख आराध्य गोविंददेवजी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी, इसमें भक्तों के लिए एकादशी व्रत के महत्व के अनुसार विशेष अनुष्ठान होंगे। इन आयोजनों में मंदिर की परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, और शृंगार के साथ-साथ अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित होगी।
एकादशी व्रत का महत्व बताते हुए पं. अनिल कुमार विद्रोही ने बताया कि एकादशी, जिसे भगवान हरि का दिन माना जाता है, व्रत-उपवास और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक शुभ दिन है। शहर के कई मंदिरों में एकादशी के दिन विशेष पूजा और श्रृंगार के साथ-साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रम भी होते हैं। इन आयोजनों में भगवान की विशेष झांकियां, भजन-कीर्तन के आयोजन होंगे।
मोक्षदा एकादशी सद्गति दिलाने वाली
पं. विद्रोही के अनुसार मोक्षदा एकादशी, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है। इसे मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है। इस साल मोक्षदा एकादशी 30 नवंबर को रात्रि 09:29 बजे से लेकर 1 दिसंबर को शाम 7:01 बजे तक रहेगी। इसलिए, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर दिन को रखा जाएगा। इस व्रत से पापों का नाश होता है, पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और आत्मा को मुक्ति का मार्ग मिलता है।
मोक्षदा एकादशी का व्रत विष्णु जी की पूजा के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस दिन उपवास, पूजा और दान करने से पापों का नाश होता है और कई गुना फल मिलता है। यह एकादशी व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।




















