माता-पिता के साथ बेटा -बेटी भी अपना फर्ज निभाएं:आशीष महाराज

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The movement of three planets will change on Mahashivratri
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जयपुर। द्वादश ज्योती कथा महोत्सव प्रबन्ध समिति जयपुर की और से रामेश्वरधाम में आयोजित शिवपुराण कथा महोत्सव के तहत पंचम दिवस पर आशीष महाराज ने बताया कि मनुष्य को रोजाना सुबह ईश्वर के आगे खड़े होकर यह प्रार्थना करनी चाहिए कि हे प्रभू मैं आपको कभी भूलूं नहीं और ईश्वर से प्रार्थना में यह कहना चाहिए कि हे प्रभु जो मेरे हित में हो वही कार्य मेरे लिए करना।

समिति के मंत्री रामबाबू झालानी के अनुसार आशीष महाराज ने आगे बताया कि नारद जी ने विष्णु भगवान से सुन्दर स्वरुप मांग था और ईश्वर ने उन्हें बन्दर का रुप दे दिया क्योंकि इसी रुप में नारद मुनिजी का उद्धार होना था, अगर मोहनी से उनका विवाह हो जाता तो नारद मुनि का उद्धार नहीं होता। नारद जी को अभिमान हो गया था लेकिन इश्वर ने उनका अभिमान नष्ट कर के उनका उद्धार किया।

इसलिए मनुष्य को कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए मनुष्य को हमेशा सभी के प्रति सद्भावना रखनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति कि निन्दा नहीं करनी चाहिए। आशीष महाराज ने बताया कि रामजी ने हमेशा शिवजी का ध्यान किया और शिवजी ने रामजी का ध्यान किया।

माता सती ने सीता का रुप धारण करके रामजी की परीक्षा ली और शिवजी से झूठ बोला शिवजी का राम-सीता से मां- बाप का रिश्ता है। इसलिए शंकर ने माता सती का त्याग किया।

आशीष महाराज ने बताया कि मनुष्य को हमेशा परिवार से अगर कोई सदस्य नाराज हो तो परिवार के मुखिया को उसको मनाना चाहिए जैसे शंकर के पुत्र कार्तिकेय, गणेशजी के विवाह के कारण नाराज़ हो कर मल्लिका पहाड़ पर चले गए थे उनको शंकर और पार्वती मनाने के लिए मल्लिका पहाड़ गये। उसी जगह को आज मलिकार्जुन ज्योतीलिंग नाम से जाना जाता है।

आशीष महाराज ने बताया कि हर मां बाप को पुत्र एवं पुत्री का हमेशा ध्यान रखना चाहिए और पुत्र को भी मां-बाप कि आज्ञा का पालन करना चाहिए। सभी भक्तों ने समापन में यज्ञ हवन किया और अपने परिवार के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर के हमेशा के लिए खुशिया मांगी।
इस मौके पर सभी यात्रीगण रामेश्वरम धाम से कन्याकुमारी दर्शन के लिए रवाना हुए और कन्याकुमारी से मदुरई त्रिचनापल्ली और तंजोर के दर्शन भी किए। 20 सितंबर से केदारनाथ नाथ पर कथा होगी।

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