जयपुर। रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) जयपुर द्वारा हस्तनिर्मित कागज उद्योग में परिपत्र अर्थव्यवस्था के लिए विकेन्द्रीकृत बायोचार-आधारित अपशिष्ट जल उपचार विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला एमएनआईटी जयपुर, लॉफबरो विश्वविद्यालय (यूके) तथा कुमारप्पा राष्ट्रीय हस्तनिर्मित कागज संस्थान (केएनएचपीआई), जयपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित हुई। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. मधु अग्रवाल (एमएनआईटी) एवं डॉ. मार्क लीपर (लॉफबरो विश्वविद्यालय) ने किया। तकनीकी सत्रों में डॉ. डी. बी. दास (लॉफबरो विश्वविद्यालय) एवं डॉ. साक्षी (केएनएचपीआई) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उद्घाटन एवं सत्रों में प्रो. दिलीप शर्मा (डीन, अंतरराष्ट्रीय एवं एलुमनाई अफेयर्स), प्रो. ए. बी. गुप्ता, डॉ. राजीव कुमार दोहरे (विभागाध्यक्ष, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग) तथा प्रो. मधु अग्रवाल उपस्थित रहे। वक्ताओं ने पारंपरिक एवं लघु उद्योगों के लिए सतत, किफायती और विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया। सांगानेर के हस्तनिर्मित कागज़ उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय अनुभव साझा किए।
पीएचडी शोधार्थियों एवं परास्नातक विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से संवाद और चर्चाएँ समृद्ध रहीं। कार्यशाला ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, उद्योग–शैक्षणिक सहभागिता और हस्तनिर्मित कागज़ क्षेत्र में सतत परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




















