मीरा बाई और साधु-संतों पर टिप्पणी से आक्रोश, संत समाज ने की कार्रवाई की मांग

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जयपुर। श्रीमद्भागवत सेवा महापुराण अमृतम नामक पुस्तक में साधु-संतों और भक्त कवयित्री मीरा बाई पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर संत समाज में रोष फैल गया है। बालयोगी नेमिनाथ ने इस विवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

बालयोगी ने कहा कि उक्त पुस्तक के लेखक,संपादक और प्रकाशक ने मीरा बाई को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने इसके साथ ही किताब में मनमाने तौर पर मनगढ़ंत भद्दे प्रसंग शामिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा की पुस्तक में साधु-संतों को आतंकवादी और उनके कार्यों को धर्म के विपरीत बताया है। इसके अलावा नारायण सेवा संस्थान पर भी धर्मशास्त्रों और संतों का अपमान कर व्यापारिक लाभ लेने का आरोप लगाया गया है।

आचार्य महामंडलेश्वर की उपाधि वापस लेने की मांग

बालयोगी नेमिनाथ ने पुस्तक के मुख्य संकलनकर्ता संत कैलाश मानव के खिलाफ आक्रोश प्रकट करते हुए उनकी आचार्य महामंडलेश्वर की उपाधि वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कैलाश मानव ने देवी-देवताओं और संत समाज पर अभद्र टिप्पणियां की हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

अन्न त्याग कर लिया आंदोलन का संकल्प

बालयोगी नेमीनाथ ने विरोध स्वरूप अन्न त्यागने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब तक इस पुस्तक के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती और संत समाज की प्रतिष्ठा बहाल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार से न्याय की अपील

संत समाज ने राज्य सरकार से अपील की है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए और उक्त पुस्तक को प्रतिबंधित किया जाए। साथ ही पुस्तक के लेखक, संपादक, प्रकाशक मंडल और संकलनकर्ता पर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

आमजन में आक्रोश

इस मुद्दे को लेकर स्थानीय जनता में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस विवाद को लेकर मेड़तासिटी में कई धार्मिक संगठनों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।

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