जयपुर। मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज संगम में ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम स्नान से रोके जाने तथा साधु-संतों के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर रोष बढ़ता ही जा रहा है। इस प्रकरण के विरोध में गौमाता राष्ट्र माता अभियान एवं गो-संसद से जुड़े पदाधिकारियों ने शनिवार को जवाहर कला केन्द्र में बैठक कर इसे सनातन धर्म का अपमान और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।
गौमाता राष्ट्रमाता अभियान एवं गौ संसद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस पूरे प्रकरण में शीघ्र सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो 27 जनवरी को सुबह नौ बजे गोविंद देवजी मंदिर से कलेक्ट्रेट तक साधु-संतों एवं आमजन को साथ लेकर प्रतिकार यात्रा निकाली जाएगी। दोपहर 12 बजे जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे घटनाक्रम में हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
गौमाता राष्ट्रमाता अभियान के प्रभारी एवं गौ सेवादिश: पश्चिम भारत बाबूलाल जांगिड ने कहा कि शंकराचार्य कोई राजनीतिक पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक प्राचीन सनातन मठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें बिना किसी लिखित आदेश, निषेधाज्ञा अथवा स्पष्ट कारण के संगम स्नान से रोकना पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक है। यह घटना किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के सम्मान से जुड़ा विषय है।
गो-संसद के प्रदेश सह प्रभारी, राजस्थान ताराचंद कोठारी ने बताया कि प्रशासन ने ‘प्रोटोकॉल’ और ‘भीड़ के खतरे’ का हवाला देकर शंकराचार्य जी को संगम क्षेत्र में प्रवेश से रोका, जबकि उपलब्ध वीडियो फुटेज एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस समय वहां कोई असामान्य भीड़ नहीं थी। उसी दौरान अन्य धार्मिक समूहों को संगम स्नान की अनुमति दी गई।
गो-संसद के प्रदेश सह सचिव, राजस्थान देवकीनंदन पुरोहित ने कहा कि शंकराचार्य जी को एक समय पर अकेला छोड़ दिया गया तथा बिना वर्दी वाले अज्ञात लोगों द्वारा घेरकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। जयपुर गौ सांसद सुरेंद्र सिंह अचलपुरा बताया कि शंकराचार्य जी के शिष्यों—जिनमें महिलाएं, वृद्ध एवं नाबालिग शामिल थे के साथ दुव्र्यवहार और बल प्रयोग किया गया।
प्रेस वार्ता में गो-संसद के प्रतिनिधियों ने वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी द्वारा एक साधु की चोटी पकडक़र उन्हें जमीन पर घसीटते हुए मारपीट किए जाने के दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।




















