समाज के शत्रुओं के समूल नाश की कामना के साथ बगलामुखी महायज्ञ की महापूर्णाहुति

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Yagya
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जयपुर। समाज के शत्रुओं के समूल नाश की कामना के साथ महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि महाराज के सान्निध्य में राजापार्क के श्रीराम मंदिर मंदिर में 17 दिसंबर से चल रहे नौ दिवसीय मां बगलामुखी महायज्ञ की गुरुवार को शुभ मुहूर्त में संतों-महंतों के सान्निध्य में महापूर्णाहुति हुई। वेद मंत्रोच्चार की मंगल ध्वनि से मंदिर गूंजायमान हो उठा। सैंकड़ों लोगों ने यज्ञशाला की परिक्रमा की।

राष्ट्रीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. विजय कौशिक ने बताया कि नौ दिन चले महायज्ञ में करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने 11 किलो शुद्ध गौघृत और हवन सामग्री से करीब 11 लाख आहुतियां प्रदान की। यज्ञ प्रतिदिन सुबह-शाम सात घंटे हुआ। सनातन धर्म की रक्षा, जागृति, बाधाओं के नाश और धर्म मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त करने की कामना के साथ नारियल गोले के साथ ऊं पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते स्वाहा:

के साथ यज्ञ की महापूर्णाहुति की गई। इसके बाद वसो: पवित्रमसि शतधारं, वसो पवित्रमसि सहस्रधारम् देवस्त्वा सविता पुनातु वसो:, पवित्रेण शतधारेण सुप्वा, कामधुक्ष: स्वाहा: के साथ घृत की अविरल धार यज्ञ में समर्पित की गई। वसोर्धारा से पूर्व मिष्ठान की आहुति प्रदान कर यज्ञ के दौरान हुई भूलों का प्रायश्चित होम किया गया। नीराजनम् आरती, घृतावघ्राणम्, भस्म धारणम्, क्षमा प्रार्थना, शुभकामना, पुष्पाजंलि, शंाति अभिसींचन, सूर्य अघ्र्यदान, प्रदक्षिणा के बाद आहावित देव शक्तियों को विदाई दी गई।

यज्ञ के समापन पर भंडारा हुआ।  करीब श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी ग्रहण की।

आयोजन समिति के अध्यक्ष समाजसेवी चंद्रप्रकाश अग्रवाल ने सभी का आभार प्रकट किया। इस मौके पर एडवोकेट चंद्रप्रकाश खेतानी, राजू बॉक्सर, गुरवीर सिंह सूरी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। महायज्ञ राजस्थान के अन्य स्थानों पर भी आयोजित करने की घोषणा की गई

यज्ञ सर्वश्रेष्ठ कर्म- गोपाल शर्मा:

मुख्य यजमान के रूप में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने वेद मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां प्रदान की। गोपाल शर्मा ने कहा नौ दिनों तक हजारों लोगों द्वारा अर्पित की गई लाखों आहुतियां के प्रभाव से देश-प्रदेश पर निश्चित रूप से रक्षा कवच का निर्माण होगा। क्योंकि यज्ञो को वेद में श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है। महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि महाराज ने कहा कि यज्ञ से परिपुष्ट हुई देव शक्तियों के आशीर्वाद से राजस्थान और भारत अपने परम वैभव को प्राप्त करेंगे। जो भी अनिष्टकारी ताकते हंै यज्ञ के प्रभाव से उनका समूल नाश होगा। इसके साथ हर सनातनी व्यक्ति को अपने धर्म की रक्षा के लिए आगे आना होगा। धर्म उसी की रक्षा करता है जो धर्म की रक्षा करता है।

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