बासंती बयार ने जेकेके में जमाया डेरा, तीन दिवसीय बसंत पर्व का आगाज़

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जयपुर। मौसम में बसंत की रंगत देखते ही बनती है और ऋतुराज के स्वागत में जवाहर कला केन्द्र भी बासंती रंग में रंग गया है। केन्द्र की ओर से बसंत के उल्लास और हर्ष को बयां करने वाले तीन दिवसीय बसंत पर्व की सोमवार को शुरुआत हुई। डॉ. विजय सिद्ध की परिकल्पना और निर्देशन में हुए कहरवा फ्यूज़न में कलाकारों ने गायन और वादन की सम्मिलित प्रस्तुति से बसंत के सौंदर्य का बखान किया। शास्त्रीय, लोक और वेस्टर्न संगीत फ्यूज़न ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

पंडित देबाजीत चक्रवर्ती ने सितार पर राग शुद्ध बसंत छेड़कर बासंती बयार का स्वागत किया। तबले पर डॉ. विजय सिद्ध ने जुगलबंदी कर माहौल को और भी बसंतमय बना दिया। फिर पंडित रमेश मेवाल ने बसंत कहरवा में परज बसंत की रचना ‘फगवा बृज देखन को चली’ एवं बुंदु खां लंगा ने प्रसिद्ध लोक रचना ‘दल बादली’ की प्रस्तुति से दाद बटोरी। कहरवा ताल में निबद्ध ‘पधारो म्हारे देश’ की प्रस्तुति के साथ महफिल अब परवान चढ़ने लगी। तबला, जैज ड्रम, ढोलक और खड़ताल के साथ ताल कचहरी की विशेष प्रस्तुति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद रंग कहरवा, ‘आज रंग है’, सूफी कहरवा ‘छाप तिलक’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। पंडित रमेश मेवाल ने शास्त्रीय गायन, बुंदु खां लंगा ने लोक गायन किया। खड़ताल पर सोनू, ढोलक पर बरकत, की-बोर्ड पर अर्जुन, गिटार पर अरिहंत और जैज ड्रम पर रोनित ने संगत की।

गौरतलब है कि बसंत पर्व के दूसरे दिन 13 फरवरी को 4:30 बजे कृष्णायन में बैरागी बसंत कार्यक्रम होगा। इसमें कविता, गीत और भजन के माध्यम से बसंत के सौंदर्य का बखान होगा। 13 फरवरी को शाम 6:30 बजे से रंगायन में शास्त्रीय संगीत की महफिल सजेगी। पंडित चंद्र मोहन भट्ट और स्ट्रिंग्स म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट वर्कशॉप के प्रतिभागी सामूहिक सितार वादन और जे गांधी बांसुरी वादन की प्रस्तुति देंगे।

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