जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से बुधवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पंवार सहित कांग्रेस नेता, जिलाध्यक्ष और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-यू का उल्लंघन करते हुए समय पर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं कराए। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हुए एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन चुनाव नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंचों को प्रशासक लगाया गया, जबकि प्रधान और जिला परिषद सदस्य कार्यमुक्त कर दिए गए, जिससे ग्रामीण विकास पूरी तरह ठप हो गया है।
डोटासरा ने कहा कि पिछले दो वर्षों से पंचायती राज संस्थाओं को विकास के लिए कोई राशि नहीं मिली। सरकार की निष्क्रियता के कारण केन्द्र से मिलने वाले लगभग 3000 करोड़ रुपये के लैप्स होने का खतरा है। उन्होंने भाजपा पर ओबीसी आयोग के गठन में देरी कर आरक्षण प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप भी लगाया।
राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कांग्रेस में अब टिकट योग्यता के आधार पर दिए जाएंगे। पंचायती राज व्यवस्था कांग्रेस की देन है और भाजपा इसे कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी को मजबूत करने का आह्वान किया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मनरेगा पंचायती राज की सबसे सशक्त योजना थी, जिसे भाजपा सरकार ने समाप्त कर गरीबों के अधिकार छीने हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र पर राजस्थान का 5000 करोड़ रुपये से अधिक मनरेगा बकाया है और नई व्यवस्था में राज्य सरकार पर 40 प्रतिशत वित्तीय भार डाल दिया गया है।
सम्मेलन को डॉ. सी.पी. जोशी, सुनील पंवार, रीना वाल्मीकि, सी.बी. यादव, दिनेश सुंडा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। एमकेएसएस के सामाजिक कार्यकर्ताओं शंकर लाल, मुकेश कुमार और कमल टांक ने मनरेगा को लेकर तथ्य प्रस्तुत करते हुए मनरेगा बचाओ अभियान पर विचार रखे।




















