जयपुर। चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च हिन्दू नववर्ष से होगा और इसका समापन 27 मार्च को होगा। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। हालांकि, ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार माता रानी पालकी पर सवार होकर आएगी और हाथी पर उनकी विदाई होगी। हाथी पर विदाई होने अपने-आप में एक शुभ सकेंत है। जिसे शास्त्रों में एक विशेष संकेत माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में माता दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर धरती पर आती हैं और किस वाहन से विदा होती हैं, इसका देश-दुनिया और प्रकृति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषचार्य बनवरी लाल शर्मा ने बताया की वर्ष – 2026 की चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन ‘पालकी’ (डोली) पर होगा।
शास्त्रों में माता का पालकी पर आना बहुत शुभ नहीं माना जाता है. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक उथल-पुथल का सूचक माना गया है। पालकी पर आगमन के संभावित प्रभाव हो सकते हैं। बताया जा रहा है की जब मां पालकी पर आती हैं, तो प्रकृति में अचानक बदलाव देखे जा सकते हैं।
बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि या तेज आंधी-तूफान आने की संभावना बनी रहती है, जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है। इसके साथ देश और समाज में भी वैचारिक मतभेद भी बढ़ सकते है। राजनीतिक क्षेत्र में उथल-पुथल या बड़े बदलाव के संकेत मिलते हैं। इसी के साथ स्वास्थ्य पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस दौरान मौसमी बीमारियों, संक्रमण और बुखार जैसी समस्याओं में वृद्धि हो सकती है।
बताया जा रहा है की इस बार माता रानी पालकी पर सवार होकर आ रहीं है और उसकी विदाई हाथी पर होगी। हाथी पर माता रानी का प्रस्थान बेहद शुभ माना जाता है। यह सुख, समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक है। आगमन के नकारात्मक प्रभावों को माता की हाथी पर विदाई काफी हद तक संतुलित कर देती है, जिससे अंततः समाज में खुशहाली लौटती है।
शर्मा ने बताया की पालकी पर माता रानी के आगमन से घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि भक्त सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की आराधना करें, तो हर संकट टल सकता है। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और नौ दिनों का उपवास रखना अत्यंत फलदायी होता है।
इससे न केवल घर में शांति और समृद्धि आती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का नाश भी होता है। चैत्र नवरात्रि आस्था, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। बताया जा रहा है की 19 मार्च से प्रारंभ होने वाले चैत्र नवरात्रि की सभी मंदिरों में तैयारियों शुरु हो चुकी है। जिसमें माता रानी की पोशाक और प्रतिदिन चढाने वाले प्रसाद और घट स्थापना के बारे में रणनीति तैयारी की जा चुकी है।




















