नवमी पूजा पर मंदिरों में उमड़ी भीड़: श्रद्धालुओं ने खुशहाली-शांति की कामना

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Ahoi Ashtami fast will be observed tomorrow in five auspicious yogas
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जयपुर। नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की गई। मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों और सफलताओं की दाता माना जाता है। उनका स्वरूप बहुत शांत और दिव्य है। माना जाता है कि मां सिद्धिदात्री की विधि और श्रृद्धा भाव से पूजा करने से भक्तों को भौतिक सुख, संपत्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन शुक्रवार को देवी मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन किए और कन्या पूजन के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान का समापन किया। इस दौरान कई स्थानों पर मेले और देवी जागरण का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर माता मंदिर का विशेष श्रृंगार भी किया गया।

वहीं आमेर स्थित शिला माता मंदिर में दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं ने विशेष रूप से माता का दर्शन कर नारियल और चुनरी चढ़ाई तथा परिवार की मंगल कामना की। इस मौके पर व्रतधारियों ने मंदिरों व घरों में भी हवन-पूजन कर महामंत्रों के बीच पूर्णाहुति दी। इसके बाद नौ दुर्गा स्वरूप कन्याओं का पूजन किया गया और उन्हें हलवा, पूड़ी, खीर, चना प्रसादी का भोजन कराया गया। सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा भी दी गई।

पुरोहितों को भी दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया गया। शहर के खोले के हनुमानजी, चांदपोल, सांगानेरी गेट, पंचमुखी हनुमानजी , अंबाबाड़ी, पापड़ के हनुमानजी, ढहर के बालाजी, संकट मोचन हनुमानजी मंदिर सहित शहर के अन्य हनुमान मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना के आयोजन हुए वहीं नवाह्न परायण पाठों का हवन पूजा के साथ समापन हुआ। इस मौके पर भक्तों की और से हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष आयोजन किए गए।

चैत्र नवरात्र के नौ दिनों की शक्ति उपासना का समापन जवारे यानी जौ विसर्जन के साथ होता है। हिंदू धर्म में जवारे को सुख-समृद्धि, उन्नति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जवारे जितनी अच्छी तरह उगती हैं, माता रानी की कृपा उतनी ही अधिक बरसती है।

माता के दरबार में घट स्थापना के साथ उगाएं गए जवारों का पूजा के बाद शुक्रवार को विभिन्न मंदिरों व घरों में स्थापित जवारे का चल समारोह के साथ विसर्जन किया गया। मां दुर्गा की कृपा स्वरूप प्राप्त ये जवारे सिर्फ पौधे नहीं बल्कि समृद्धि, सौभाग्य और आशीर्वाद का प्रतीक माने जाते हैं। कई जगह दशमी तिथि पर जवारे विसर्जन किया जाएगा।

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