जयपुर। जयपुर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने ठगी के एक नए और खतरनाक तरीके यूएसएसडी कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम को लेकर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने आमजन को सतर्क करते हुए बताया है कि साइबर ठग अब डिलीवरी एजेंट बनकर लोगों के मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर बैंक खातों से रकम पार कर रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में साइबर अपराधियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में यह एडवाइजरी जारी की गई है।
उप महानिरीक्षक (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि इस ठगी में अपराधी खुद को कूरियर कंपनी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या फूड डिलीवरी एजेंट बताकर कॉल करते हैं। वे बहाना बनाते हैं कि पता सही नहीं मिल रहा या पार्सल डिलीवरी के लिए वेरिफिकेशन जरूरी है। इसके बाद वे तकनीकी समस्या का हवाला देकर पीड़ित से मोबाइल पर एक विशेष कोड डायल करवाते हैं।
ठग पीड़ित से *21, *67 या 61 के साथ एक मोबाइल नंबर डायल करवाते हैं। जैसे ही यह कोड डायल किया जाता है, मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सुविधा सक्रिय हो जाती है। इसके बाद पीड़ित के फोन पर आने वाली सभी कॉल्स, ओटीपी और वेरिफिकेशन कॉल सीधे ठग के नंबर पर पहुंचने लगती हैं, जिससे वह आसानी से बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बना लेता है। इन कोड्स से 21मोबाइल नंबर# ,67मोबाइल नंबर# और 61मोबाइल नंबर# सतर्क रहे।
साइबर शाखा ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल से कोई कोड डायल न करें, चाहे वह खुद को डिलीवरी एजेंट ही क्यों न बताए। पार्सल या डिलीवरी से जुड़ी जानकारी के लिए हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।
यदि किसी को संदेह हो कि उसके फोन की कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई है, तो तुरंत ##002# डायल करें। इससे सभी कॉल फॉरवर्डिंग सेवाएं तुरंत बंद हो जाती हैं।
पुलिस ने अपील की है कि इस तरह की ठगी का शिकार होने पर तुरंत नजदीकी थाने या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।



















