उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने किया पीडीकेएफ आर्टिजंस कलेक्टिव का अवलोकन

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Deputy Chief Minister Diya Kumari visited the PDKF Artisans Collective.
Deputy Chief Minister Diya Kumari visited the PDKF Artisans Collective.

जयपुर। सिटी पैलेस में प्रिंसेस दिया कुमारी फाउंडेशन (पीडीकेएफ) द्वारा आयोजित हो रहे ‘पीडीकेएफ आर्टिजंस कलेक्टिव’ के दूसरे संस्करण का उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने अवलोकन किया। यह विशेष कार्यक्रम देश के 20 से अधिक राज्यों से 70 से अधिक महिला कारीगरों और उद्यमियों को एक मंच पर लाया है, जहां उन्हें अपने शिल्प को प्रदर्शित करने, विविध लोगों से जुड़ने और अपना स्वयं का बाजार स्थापित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फाउंडेशन की महिलाओं द्वारा यह एक सराहनीय पहल की गई है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देशभर की महिला कारीगरों को अपनी प्रतिभा और हस्तकला को प्रस्तुत करने के लिए एक सशक्त और प्रभावी मंच प्रदान करता है। कार्यक्रम के आयोजन के समय की महत्ता को रेखांकित करते हुए दिया कुमारी ने कहा कि जनवरी राजस्थान में टूरिज्म का पीक सीज़न होता है और सप्ताहांत पर इस प्रकार के आयोजन से अधिक संख्या में पर्यटक आते हैं। इससे न केवल कार्यक्रम में बेहतर सहभागिता और संवाद संभव होता है, बल्कि महिला कारीगरों और उनके उत्पादों को व्यापक दृश्यता भी मिलती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस तरह की पहलें महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा को भी वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक होंगी।

’द फ्यूचर ऑफ क्राफ्ट’ पर चर्चा सत्र

दिन के कार्यक्रम में ‘द फ्यूचर ऑफ क्राफ्ट’ शीर्षक से एक विचारोत्तेजक सत्र भी आयोजित किया गया। इस सत्र में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिज़ाइन की निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता ने खानूम और अराइश की सह-संस्थापिका प्रियंवदा गोलच्छा के साथ संवाद किया। इस चर्चा के दौरान शिल्प क्षेत्र के बदलते परिदृश्य, उसकी संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर दर्शकों को महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि भारत की समृद्ध शिल्प विरासत किस तरह समकालीन दुनिया के साथ खुद को ढाल सकती है, जहां शिक्षा, तकनीक और बदलते उपभोक्ता मूल्य इस क्षेत्र को नई दिशा दे रहे हैं। पारंपरिक शिल्प प्रथाओं को आधुनिक संदर्भ में पुनर्कल्पित करने से लेकर उपभोक्ताओं के बीच गहरी जागरूकता पैदा करने तक, चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला कि विरासत शिल्प का केवल संरक्षित ही नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें उद्देश्य के साथ सक्रिय रूप से मनाया, संजोया और आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

‘ए ट्रेज़र ऑफ टेल्स बियॉन्ड क्राफ्ट’ प्रस्तुति

कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरते हुए तृप्ति पांडे की विशेष प्रस्तुति ‘ए ट्रेज़र ऑफ टेल्स बियॉन्ड क्राफ्ट’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रोचक स्टोरीटेलिंग ने भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को जीवित किया। प्रस्तुति में 6–7 कलाकारों के साथ मंच पर कहानी और संगीत को खूबसूरती से पिरोया। स्टोरीटेलिंग और लाईव संगीत के संगम के माध्यम से इस प्रस्तुति ने भारत की शिल्प परंपराओं की आत्मा को उजागर किया, जिसमें कालीघाट चित्रकला, पंजाब की फुलकारी, बिहार की मधुबनी, तेलंगाना की लम्बाडी शिल्प परंपराएं और राजस्थान की भोपा–फड़ कथावाचन परंपरा से जुड़ी भावनात्मक कहानियां शामिल थीं। हर कथा शिल्प, संस्कृति और स्मृति के बीच एक सेतु बन गई, जिसने दर्शकों को यह याद दिलाया कि ये परंपराएं केवल कलात्मक वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जीवंत कहानियां हैं।

इसके अतिरिक्त, ‘हेरिटेज क्राफ्ट स्टाइलिंग’ पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन भी किया गया, जिसका संचालन सुरभि शुक्ला ने किया। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को पारंपरिक शिल्प को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करने के रचनात्मक तरीकों से परिचित कराया गया। इस उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में आर्टिजन बाज़ार और स्टूडियो बेरो द्वारा आयोजित रचनात्मक कार्यशालाएं शामिल रहीं। इन गतिविधियों ने न केवल शिल्प और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया, बल्कि आगंतुकों को कला की प्रक्रिया से भी जोड़ने का अवसर दिया। शाम के सत्र में विशेष प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध गायिका लीसा मिश्रा की मन मोहक प्रस्तुतियों ने माहौल को संगीतमय बना दिया, वहीं जोया भार्गव ने लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों के साथ श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। दूसरे दिन का समापन रंगारंग नाइट बाज़ार के साथ हुआ, जहां रोशनी, संगीत और शिल्प का अनूठा संगम देखने को मिला।

एग्जीबिशन में पर्यटकों, कला प्रेमियों और हस्तशिल्प प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति देखने को मिल रही है। आगंतुक न केवल भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा और कलात्मकता की सराहना कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी भी कर रहे हैं। इसके साथ ही, वे स्टॉल संचालकों से सीधे संवाद कर उनकी कारीगरी की बारीकियों को समझ रहे हैं और प्रत्येक रचना के पीछे छिपी परंपराओं व सांस्कृतिक विरासत के बारे में गहन जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। यह एग्जीबिशन शिल्पकारों और दर्शकों के बीच एक सार्थक और जीवंत संवाद का सशक्त मंच बनकर उभर रही है।

गौरतलब है कि पीडीकेएफ आर्टिज़न कलेक्टिव, की संकल्पना जयपुर की प्रिंसेस गौरवी कुमारी ने की है। कलेक्टिव एशियन एनर्जी सर्विसेज़ एवं ऑयलमैक्स द्वारा प्रजेंटेड है और सहज द्वारा प्रायोजित है। कलेक्टिव का हॉस्पिटैलिटी पार्टनर द लीला, इंस्टीट्यूशन पार्टनर आईआईसीडी, वर्कशॉप पार्टनर स्टूडियो बेरो, नॉलेज पार्टनर फोरहेक्स, रेडियो पार्टनर रेड एफएम 93.5, ट्रैवल पार्टनर राजस्थान रूट्स और एसोसिएट पार्टनर जयपुर विरासत फ़ाउंडेशन है।

तीसरा दिन | 25 जनवरी 2026

अंतिम दिन में कारीगरों के लिए मार्केटिंग और क्षमता निर्माण कार्यशालाओं पर ध्यान केंद्रित होगा, जिनका नेतृत्व फोरहेक्स द्वारा किया जाएगा। साथ ही पैनल चर्चाएं होंगी, जिसमें प्रियंका खन्ना, जयपुर रग्स की रुत्वी चौधरी और इंजीरी की चिनार फारूकी के साथ शिल्प को सांस्कृतिक अभिलेख के रूप में प्रकाश डाला जाएगा। वहीं, प्राजक्ता कोली के साथ यूथ एज एजेंट्स ऑफ़ चेंज पर एक संवाद आयोजित होगा। कलेक्टिव का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अंतिम नाइट बाज़ार अनुभव के साथ होगा।

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