जयपुर। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी वैतरणी और उत्पन्ना एकादशी के रूप में मनाई गई। उत्पन्ना एकादशी पर कई श्रद्धालुओं ने वर्ष भर एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लिया। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, विष्कुंभ, शुक्रादित्य और हंस योग सहित शुभ संयोगों में श्रद्धालुओं ने श्री हरि भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और व्रत रखा। छोटीकाशी के सभी कृष्ण एवं विष्णु मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई गई। मुख्य आयोजन आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में हुआ। हजारों की संख्या में श्रद्धालु ठाकुर श्री राधा कृष्ण के दर्शन करने पहुंचे।
सुबह मंगला के बाद गुनगुने जल से स्नान के बाद पंचामृत से ठाकुरजी का अभिषेक कर लाल रंग की गर्म जामा पोशाक धारण कराई गई। गोचारण लीला के भाव से चंदन और पुष्प श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के दर्शन कर हरिनाम संकीर्तन करते हुए बड़ी परिक्रमा की। सुबह मंगला झांकी में मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। अनेक मंडलियां कीर्तन करते हुए दर्शन करने पहुंची। इससे पूर्व मंदिर के पट खुलने से पूर्व मुख्य द्वार पर विनय के पदों का गायन किया गया।
चौड़ा रास्ता के राधा दामोदर जी मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में महिलाओं ने एकादशी कीर्तन किया। यहां आकर्षक झांकी सजाई गई। पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ जी मंदिर में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में विशेष पूजन किया गया।
सरस पदों से ठाकुरजी को रिझाया
सुभाष चौक पानो का दरीबा स्थित श्री शुक संप्रदाय की प्रधान पीठ श्री सरस निकुंज में शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सानिध्य में श्री राधा सरस बिहारी सरकार का वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत अभिषेक किया गया। ऋतु पुष्पों से मनोरम श्रृंगार किया गया। फलों का भोग लगाकर आरती की। श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया के निर्देशन में वैष्णव महानुभावों ने सरस पदों से ठाकुरजी को रिझाया।
श्याम मंदिरों में जली अखंड ज्योति
छोटीकाशी स्थित सभी श्याम मंदिरों में एकादशी पर बाबा के दरबार में अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई। चौगान स्टेडियम, मानसरोवर, जगतपुरा, महेश नगर, झोटवाड़ा, शास्त्री नगर, वीकेआई, विजयवाड़ा सहित सभी श्याम मंदिरों में भक्ति भाव से एकादशी उत्सव मनाया गया।
गलता गेट स्थित गीता गायत्री मंदिर में पं. राजकुमार चतुर्वेदी के सान्निध्य में श्याम प्रभु का रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया। फूलों से नयनाभिराम श्रृंगार कर अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई।




















