देवउठनी एकादशी गुरुवार को, शुरू होंगे मांगलिक कार्य

जयपुर। कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी गुरुवार को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। बुधवार को देवउठनी एकादशी पर सूरज उगने से पहले ब्रह्म मुहूर्त में शंख बजाकर भगवान विष्णु को जगाया जाएगा। भगवान विष्णु के जागते ही प्रदेश भर में मांगलिक कार्य शुरू हो जाऐंगे। गुरुवार को देव प्रबोधिनी एकादशी पर दिनभर महापूजा और भगवान का श्रृंगार होगा। शाम को भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से तुलसी विवाह होगा और दीपदान किया जाएगा।

इसी दिन से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे- विवाह, मुंडन, गृह-प्रवेश, उपनयन संस्कार इत्यादि मांगलिक कार्य शुरू हो जाएगे। पंडित श्री कृष्ण चंद शर्मा ने बताया कि विष्णु भगवान ने शंखासुर दैत्य को मारा था और उसके बाद चार महीने के लिए योग निद्रा में चले गए। चार महीने पूरे होने के बाद देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु जागते है और दोबारा से सृष्टि चलाने की जिम्मेदारी संभालते है। इसलिए भगवान विष्णु के जागते ही फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो जाते है। इसलिए देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।  

तुलसी विवाह की है पंरपरा

देव प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागते ही तुलसी विवाह किया जाता है साथ ही भगवान की आरती के साथ उन्हे सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु को भोग के साथ तुलसी दल चढ़ाना अनिर्वाय है। भगवान तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं करते । देवउठनी एकादशी पर्व पर  तुलसी विवाह के अलावा माता लक्ष्मी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। इस दिन तीर्थ स्नान ,दान पुण्य करने के साथ ही दीपदान करने की भी परंपरा है। बताया जाता है कि इस दिन धर्म-कर्म करने से कभी नहीं खत्म होने वाला पुण्य मिलता है। पंचांग तिथि के अनुसार कार्तिक माह में 23 से 27 नवंबर तक त्रयोदशी ,बैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा पर्व भी मनाया जाएगा। इन तीनों तिथियों में दीपदान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की विशेष कृपा मिलती है।

ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा

देवउठनी एकादशी वाले दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करें। घर में बने पूजा घर की साफ -सफाई कर दीप प्रज्वलित करें।  जिसके बाद भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक कर पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।  इस दिन व्रत करने का भी विधान है।
 

देवउठनी एकादशी व्रत और शुभ योग

पंडित शर्मा ने बताया कि एकादशी व्रत के दिन कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है, उन्हें पूजा पाठ के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। सिद्धि योग सुबह 11.55 से शुरू होगा, वहीं रवि योग सुबह 06.50 से शाम 05.16 तक रहेगा और इसके बाद सर्वार्थ सिद्धि योग प्रारंभ हो जाएगा। वैदिक शास्त्रों के अनुसार, इन सभी शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ, दान इत्यादि कर्म करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन सावे शुरू होने के साथ ही बड़ी संख्या में शादियां होगी। प्रदेशभर में विशेष आयोजन होंगे।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

25,000FansLike
15,000FollowersFollow
100,000SubscribersSubscribe

Amazon shopping

- Advertisement -

Latest Articles