जयपुर। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने तृतीय बजट पूर्व संवाद के लिए आमंत्रित किया। संवाद के दौरान महासंघ ने कर्मचारियों से जुड़ी लंबित और ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र राना ने 29 दिसंबर 2025 को जयपुर में आयोजित धरने की प्रमुख मांग को दोहराते हुए कर्मचारी संगठनों के साथ शासन सचिव स्तर पर नियमित वार्ताएं आयोजित कराने की मांग रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने संवाद के दौरान ही इसकी घोषणा करते हुए सहमति जताई।
संवाद में महासंघ अध्यक्ष द्वारा वेतन विसंगति से संबंधित खेमराज समिति की अस्वीकृत रिपोर्ट के पुनः परीक्षण हेतु नई समिति गठित करने, संविदा व निविदा कर्मियों के लंबित नियमितीकरण, आरएसएलडीसी का लंबित गठन कर ठेका प्रथा समाप्त करने, संविदा व मानदेय कर्मियों के वेतन में वृद्धि, ग्रेच्युटी, तथा 50 प्रतिशत पेंशन के लिए क्वालिफाइंग सर्विस 25 वर्ष से घटाकर 20 वर्ष करने की मांग रखी गई।
इसके साथ ही प्रबोधकों की पुरानी सेवा गणना, स्थानांतरण नीति, पदोन्नति के लिए कैडरों का पुनर्गठन, सभी कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड, हिंसा प्रतिषेध अधिनियम लागू करने, सभी नियमित, अनियमित एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बैंक खातों का उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बीमा, तथा पदनाम परिवर्तन से संबंधित लंबित पत्रावलियों के निस्तारण की मांग भी पुरजोर ढंग से रखी गई।
महासंघ के महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा ने शिक्षकों की मांगों के साथ ही एनपीएस के तहत केंद्र सरकार के पास जमा लगभग 51 हजार करोड़ रुपये की राशि को कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में जमा कराने की मांग भी उठाई।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कई मांगों को नोट करते हुए अपने वक्तव्य में अधिकतम मांगों के समाधान का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र राना, महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा, प्रवक्ता जितेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष भूदेव धाकड़, वीरेंद्र शर्मा, संयुक्त महामंत्री दयानंद सोनी सहित महासंघ के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।



















