फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट मामला: बीस और संदिग्ध डॉक्टर एसओजी की रडार पर

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जयपुर। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) सर्टिफिकेट प्रकरण में जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में जमा रिकॉर्ड की गहन पड़ताल के दौरान 20 और संदिग्ध डॉक्टरों को चिन्हित किया गया है। इन सभी के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।

एसओजी अब वर्ष 2018 से अब तक इंडियन मेडिकल काउंसिल (आईएमसी) से जुड़े अधिकारियों की नियुक्तियों और भूमिका की भी जांच करेगी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे दो अलग-अलग नेटवर्क सक्रिय थे। पहला नेटवर्क ‘जैकेट गैंग’ के नाम से जाना जाता था, जो बाद में पूरी तरह फेक एफएमजीई सर्टिफिकेट तैयार करने में जुट गया। दूसरा नेटवर्क मेडिकल काउंसिल से जुड़े दस्तावेजों की प्रोसेसिंग और सत्यापन में सेटिंग कराने का काम कर रहा था।

एसओजी की जांच में सामने आया है कि विदेश से एमबीबीएस कर लौटे ऐसे अभ्यर्थियों को निशाना बनाया गया, जो एफएमजीई स्क्रीनिंग टेस्ट पास नहीं कर पाए थे। फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए इन अभ्यर्थियों को आरएमसी से इंटर्नशिप दिलवाई गई।

जांच एजेंसी आरएमसी में जमा एफएमजीई सर्टिफिकेट के ले-आउट, सीरियल नंबर, फॉन्ट, डिजिटल सील और हस्ताक्षर का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रही है। इसके साथ ही जब्त मोबाइल, लैपटॉप और ई-मेल अकाउंट से मिले डिजिटल टेम्पलेट और चैट ग्रुप्स की भी गहन जांच चल रही है।

एसओजी अब इस फर्जीवाड़े से जुड़ी मनी ट्रेल पर फोकस कर रही है। अवैध रूप से कमाई गई रकम कहां खर्च हुई और कहां निवेश की गई, इसकी जांच शुरू हो चुकी है। दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि इस मामले में एसओजी पहले ही मास्टरमाइंड भानाराम माली उर्फ भानू को दिल्ली एयरपोर्ट से और इंद्रराज सिंह गुर्जर को दौसा से गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले गिरोह से जुड़े तीन डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

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