मावठ से खिले किसानों के चेहरे, ओलावृष्टि का सता रहा है डर

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जयपुर। राजधानी के सभी जिलों में मावठ का दौर जारी हो चुका है। शीत लहर के साथ जगह- जगह बरसात का दौर जारी है। जिसके चलते किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर छाई है। लेकिन वहीं दूसरी ओर ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए किसानों को फसल खराब होने का डर भी सता रहा है। मावठ पड़ने से रबी की फसल को काफी ज्यादा फायदा होगा।

गेहू,सरसों,चना, जौ और अन्य फसलों को भी इस मावठ से फायदा होगा। लेकिन अधिक बरसात होती है तो मसूर की फसल में नुकसान की भी संभावना जताई जा रही है। मावठ से फसलों में पोषक तत्वों की भरपाई होगी। प्रदेश भर के किसानों का मानना है कि आगामी दस दिनों तक मावठ से नमी बनी रह सकती है।

खरीफ की फसलों के लिए भी मावठ है लाभदायक

मावठ बढ़ने के साथ ही खरीफ की फसल उगाने वाले किसानों के चेहरों पर भी खुशी की लहर दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इन फसलों के उचित विकास के लिए जलमग्न पानी की आवश्यकता होती है। इन फसलों की खेती बरसात के मौसम में ही की जाती है। मक्का, ज्वार,कपास,रागी,बाजरा,गन्ना और जूट की खेती को खरीफ की फसल कहा जाता है।

इसलिए होती है सर्दी में बारिश

राजस्थान में मावठ वर्षा भूमध्यसागरीय चक्रवातों के कारण होती है। जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ भी कहा जाता है। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उत्पन्न होने वाला एक अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान है जो भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भागों में अचानक सर्दियों की बारिश लाता है।

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