जयपुर। छोटीकाशी में सुहाग पर्व गणगौर चैत्र शुक्ल तृतीया शनिवार को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक वैभव के साथ मनाया गया। विवाहित महिलाओं ने पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखकर गणगौर पूजन किया, वहीं कुंवारी कन्याओं ने योग्य वर की प्राप्ति की प्रार्थना की। सुहागिन महिलाओं और युवतियों ने विधि-विधान से ईसर-गणगौर का पूजन कर सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य एवं मनोवांछित वर की कामना की। दिनभर विभिन्न मंदिरों एवं घरों में गणगौर माता का पूजन-अर्चन कर उन्हें घेवर, शक्करपारे और गुणे का भोग अर्पित किया गया।
कई महिलाओं ने परंपरा अनुसार उद्यापन करते हुए 16 सुहागिन महिलाओं को भोजन कराकर उपहार भेंट किए, वहीं अन्य महिलाओं ने अपनी सास को बयाना देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। पहली बार गणगौर पूजन करने वाली नव विवाहिताओं में गणगौर पूजन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। गायत्री चेतना केन्द्र मुरलीपुरा की ओर से बैनाड़ रोड पर सीतावाली फाटक स्थित गणेशनगर में सामूहिक रूप से गणगौर का पूजन किया गया।
यहां मीनाक्षी शर्मा, मंजू सहित अन्य नव विवाहिताओं ने विवाह के बाद पहली बार गणगौर पूजन किया। वहीं हेमा, ज्योति सहित अन्य महिलाओं ने भी गणगौर माता का विधिवत पूजन किया। हर्षिता, पूजा, खुशी एवं अन्य युवतियों ने श्रेष्ठ घर-वर की कामना के साथ गणगौर पूजन किया। शाम को गणगौर का विसर्जन किया गया। श्रीमन्न नारायण प्रन्यास मंडल की ओर से ढहर के बालाजी स्थित श्रीमन्ननारायण धाम में सामूहिक गणगौर पूजन किया गया। डॉ. दीपिका शर्मा ने बताया कि बड़ी संख्या में कॉलोनी की महिलाओं ने गणगौर और ईसर का विधि विधान से पूजन किया। शाम को लोक गीतों के साथ गणगौर माता को विदाई दी गई।
शाम को जल स्त्रोत में किया विसर्जन
शाम को गणगौर पूजन करने वाली महिलाओं ने गणगौर को सिर पर विराजमान कर सवारी निकाली। जगह-जगह गणगौर की सवारी से राजस्थान की समृद्ध लोक कला और संस्कृति के रंग बिखरे। गीत और जयकारों के साथ गणगौर का जल स्त्रोत में विसर्जन किया गया। मुख्य रूप से तालकटोरा, जल महल, आमेर का मावठा, सागर, चंदलाई बांध में विसर्जन किया गया। कई जगह पुराने कुओ-बावड़ी में भी विसर्जन किया गया। जल स्त्रोत को गणगौर का ससुराल माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती एवं भगवान शिव के अटूट प्रेम का प्रतीक यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।




















