ज्ञान यज्ञ की ज्योति जलाने घर-घर जाएंगे गायत्री परिजन

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जयपुर। गायत्री परिवार के कार्यकर्ता एक सप्ताह से एक माह तक ऐसे क्षेत्र में जाकर कार्य करेंगे जहां समाज के उनके अनुभव और ज्ञान की आवश्यकता है। प्रत्येक कार्यकर्ता से समयदान फॉर्म भरवा कर उनकी रुचि और उपलब्धता के अनुसार सेवा गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। जिला स्तर पर समयदान नियोजन समिति गठित होगी।

गायत्री परिवार राजस्थान के मुख्य ट्रस्टी ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि अप्रैल से जून तक व्यापक अभियान चलाकर प्रत्येक कॉलोनी एवं मोहल्ले में मंडल गठन का लक्ष्य रखा गया है, ताकि प्रत्येक कार्यकर्ता किसी न किसी मंडल से अनिवार्य रूप से जुड़े।

उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार के कार्यकर्ता राष्ट्र सेवा कार्यों के लिए अब प्रतिदिन दस रूपए यानी हर माह 300 रूपए निकालेंगे। अभी तक यह राशि दो रूपए प्रतिदिन थी। गायत्री परिवार के संस्थापक जब 40 के दशक में गायत्री परिवार की स्थापना की थी तब दो पैसा प्रतिदिन अंशदान निकालने पर जोर दिया था। जो बढ़ते-बढ़ते बीस पैसा, एक रुपए, दो रुपए होते होते अब दस रूपए प्रतिदिन हो गया है। इसे ज्ञान घट योजना का नाम दिया गया है।

प्रत्येक कार्यकर्ता को न्यूनतम 10 रूपए प्रतिदिन अंशदान से जोड़ा जाएगा। अंशदान संग्रह के लिए मॉनिटरिंग समिति गठित की जाएगी, जिससे शाखा एवं शक्तिपीठों को सशक्त बनाया जा सके। जन सामान्य भी इस योजना में जुड़ सकते हैं। उन्हें निशुल्क ज्ञान घट भेंट किए जाएंगे। लोग इस राशि का स्व विवेक से भी श्रेष्ठ कार्यों में खर्च कर सकेंगे और गायत्री परिवार द्वारा संचालित सात आंदोलनों के लिए भी दे सकेंगे।

अंशदान की राशि निकालने के लिए प्रतिदिन एक चाय छोड़ने अथवा सप्ताह में एक दिन उपवास की प्रेरणा दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में अन्नघट स्थापित किए जाएंगे। प्रतिदिन एक मुंठी अनाज एक मटके में डाला जाएगा। माह के अंत में अनाज बेच कर प्राप्त राशि सेवा कार्यों में व्यय होगी।

इस योजना के अलावा हरिद्वार में जयपुर उपजोन की विस्तृत कार्य योजना घोषित की गई है। युग निर्माण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जयपुर उपजोन स्तर पर तिमाही आधार पर योजनाबद्ध कार्यों को लागू करने का निर्णय लिया गया है।

उपजोन समन्वयक सुशील कुमार शर्मा के अनुसार जयपुर उपजोन के सभी जिलों में 28 फरवरी तक जिला कार्यकर्ता गोष्ठियों का आयोजन कर अप्रैल से जून 2026 की प्रथम तिमाही की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रत्येक तिमाही में समीक्षा एवं आगामी योजना के लिए नियमित गोष्ठियां होंगी।

प्रत्येक जिले में एक दिवसीय गर्भोत्सव संस्कार प्रशिक्षण सेमिनार, साधना संकल्प समारोह तथा कन्या कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में शांतिकुंज एवं जोन स्तर के प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

जन्म शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित ‘प्रज्ञा अभियान’ के वंदनीय माताजी विशेषांक को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिलेवार लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर 5 कुंडीय एवं पुष्कर टोली के माध्यम से 9 कुंडीय यज्ञों की श्रृंखला चलाई जाएगी।

इसके अतिरिक्त, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अन्य रचनात्मक योजनाओं को भी सम्मिलित किया जाएगा। सभी जिला समन्वयकों से अनुरोध किया गया है कि वे शीघ्र ही जिला कार्यकर्ता गोष्ठियों की तिथि निर्धारित कर उपजोन को सूचित करें, ताकि जन्म शताब्दी वर्ष 2026 को जन-जन का आध्यात्मिक आंदोलन बनाया जा सके।

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