आदिवासी इलाकों में जाएगा गायत्री परिवार: सनातन से जोड़ने, नशा से दूर करने पर रहेगा जोर

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जयपुर। गायत्री परिवार आदिवासी क्षेत्रों में जाकर उन्हें नशा मुक्त बनाएगा और उनमें सनातन के संस्कारों का बीजारोपण करेगा। इस आशय का निर्णय अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से किरण पथ मानसरोवर स्थित श्री वेद माता गायत्री वेदना निवारण केन्द्र में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में लिया गया। गायत्री परिवार की संस्थापक भगवती देवी शर्मा और शांतिकुंज हरिद्वार में 99 साल से प्रज्जवलित अखंड दीपक की जन्मशताब्दी के लिए तैयार की गई व्यापक कार्ययोजना में आदिवासी अंचल में जाकर वहां तीन दिन तक कार्यक्रम करने को प्राथमिकता पर रखा गया है।

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी भाइयों को लोग गुमराह कर रहे हैं। यह समाज पशु-पक्षियों के शिकार तक सीमित हो रहा है। उन्हें साजिश के तहत नशेड़ी बनाया जा रहा है। उनके बीच जाने से ही स्थिति बदलेगी। इसके लिए 2025 की शुरुआत में अनेक टोलियां आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जाएगी। इसके लिए आदिवासी क्षेत्र में पहले से कार्य कर रहे लोगों का सहयोग भी लिया जाएगा। कार्यशाला में कई निर्णय लिए गए। इनमें 125000 कन्याओं को प्रशिक्षित करना उल्लेखनीय है। साथ ही 108 कन्याओं के विशेष प्रशिक्षण शिविर की घोषणा भी की गई।

इन्होंने किया संबोधित:

कार्यशाला में राजस्थान जोन प्रभारी एवं मुख्य ट्रस्टी ओम प्रकाश अग्रवाल, ट्रस्टी घनश्याम पालीवाल, गोपाल स्वामी, सतीश भाटी, सीताराम पारीक, पूर्व न्यायाधीश सतीश कौशिक, मातृशक्ति संयोजक गायत्री कचोलिया, पुष्कर शक्तिपीठ से व्यवस्थापक सुरेश कुमार शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ गायत्री परिजनों ने विचार व्यक्त किए। शांतिकुंज में चिंतन-मनन शिविर आयोजित करने, शक्ति कलश रथ के साथ आकर्षक झांकी जोडऩे का प्रस्ताव रखा गया। तीन दिवसीय जन्मशताब्दी सम्मेलन को बड़े रूप में आयोजित करने का निर्णय हुआ। हर जिले और तहसील में यज्ञ और संस्कार के कार्यक्रम होंगे। जिनकी शुरुआत युग निर्माण की भावना से ओत-प्रोत शोभायात्रा से होगी।

इनका भी लिया संकल्प

कम से कम 24 नई विभूतियों को जोड़ने, युग निर्माण सत्संकल्प के पाठ को नियमित करने, ज्ञान घट स्थापना, पुष्कर प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षणार्थी भेजने, जिला-स्तरीय डायरेक्ट्री 5 दिसंबर तक भेजने, गायन-वादन कार्यकर्ताओं की उपलब्धता, आदिवासी क्षेत्रों में कार्यक्रम तथा 112 स्थानों पर 9 कुंडीय यज्ञ के आयोजन पर सहमति बनी। कार्यक्रम का संचालन सुशील शर्मा ने किया।

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