देव, शास्‍त्र और गुरू जैन दर्शन में श्रद्धा, स्‍तुति, अराधना के प्रमुख आधार है

0
199

जयपुर। श्री पार्श्व‍नाथ दिगम्बर जैन मंदिर त्रिवेणी नगर मे ससंग विराजित आचार्य वसुनंदी महाराज की शिष्या आर्यिका प्रशांत नंदिनी माताजी ने बुधवार को अपने मंगल प्रवचन में बताया कि जैन धर्म में देव, शास्‍त्र और गुरू की अराधना मोक्ष मार्ग के तीन मुख्‍य स्‍तम्‍भ है । उन्‍होंने बताया कि देव यानि परमात्‍मा, जो निर्गुणी और सर्वज्ञ। वे जीवों को मोक्ष प्रदान करने के लिए मार्ग दिखाते है ।

शास्‍त्र यानि जीनवाणी जैन धर्म के आध्‍यात्मिक ग्रंथों में ज्ञान और सत्‍य निहित है । गुरू शिष्‍यों को धर्म के सही मार्ग पर चलने के लिए उन्‍हें सम्‍यक दशर्न, सम्‍यक ज्ञान और सम्‍यक चारित्र के महत्‍व को प्रेरित करते है। इस तरह उन्‍होने बताया कि देव, शास्‍त्र और गुरू जैन दर्शन में श्रद्धा, स्‍तुति, अराधना के प्रमुख आधार है।

नरेश कासलीवाल ने बताया कि इस अवसर पर महेंद्र काला, अशोक पाटोदी, नरेंद्र सेठी, अशोक पापड़ीवाल, महावीर कासलीवाल, सुनील लुहाड़िया, हीरा जैन, अजय पाण्‍डया, देवेन्‍द्र कासलीवाल, प्रशान्‍त अजमेरा, नितिन छाबड़ा, नितेश छाबड़ा, संजय सौगाणी, शुभम जैन, शिमला पापड़ीवाल, मैना पाटनी, बबीता लुहाड़िया, वन्दना अजमेरा, मृदुला काला, मोना कासलीवाल, रेणु पाटनी, लक्ष्‍मी देवी अजमेरा, निर्मला छाबड़ा, बेला पाटनी, सुमन खेर, श्‍वेता सेठ सहित बड़ी संख्या में समाज बन्धु उपस्थित थे।

इससे पूर्व मंगलवार को रात्रि मे माताजी के मुखाबिन्द से 48 दीपकों से भक्ताम्बर स्तोत्र का पाठ हुआ । बुधवार प्रातः माताजी ससंग शांतीनगर स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन किए ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here