जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित “जेन-नेक्स्ट भारत स्टार्टअप समिट – जयपुर संस्करण” ने देश के उभरते स्टार्टअप परिदृश्य को एक नई दिशा प्रदान करते हुए नवाचार, निवेश और उद्यमिता के संगम का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया। सुबह से शुरू हुए इस भव्य आयोजन में लगभग एक हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
जिनमें युवा उद्यमी, स्टार्टअप संस्थापक, निवेशक, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और उद्योग विशेषज्ञ शामिल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और स्वागत संबोधन के साथ हुई, जहां एसीआईसी-वीजीयू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव शर्मा ने राजस्थान को उभरते हुए स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इस तरह के मंच युवाओं को न केवल विचार देने बल्कि उन्हें वास्तविक व्यवसाय में बदलने का अवसर प्रदान करते हैं।
इसके पश्चात इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्टार्टअप हब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पन्नीरसेल्वम मदनागोपाल ने अपने मुख्य वक्तव्य में “जेनिसिस” दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत अब वैश्विक नवाचार मानचित्र पर अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है और सरकार का लक्ष्य है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्टार्टअप्स को सशक्त बनाकर उन्हें वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जाए। उन्होंने इस अवसर पर यह भी घोषणा की कि टियर-2 शहरों के स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग एक सौ करोड़ रुपये के निवेश और सहयोग का रोडमैप तैयार किया गया है, जिससे स्थानीय नवाचार को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में स्टार्टअप से स्केलअप तक की यात्रा, वित्तीय अनुपालन, वैश्विक विस्तार रणनीतियां और बाजार में प्रवेश की योजनाओं पर गहन चर्चा की गई। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ आयोजित “वैश्विक सोच, स्थानीय निर्माण” सत्र में यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय स्टार्टअप्स न केवल घरेलू समस्याओं का समाधान कर रहे हैं बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
महिला उद्यमिता पर केंद्रित विशेष सत्र में देशभर की सफल महिला स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे वे नवाचार के माध्यम से भारत की अगली विकास लहर का नेतृत्व कर रही हैं। दोपहर के सत्र में गौरव शर्मा ने राजस्थान के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में तेजी से विकसित हो रही इनोवेशन संस्कृति आने वाले वर्षों में हजारों युवाओं के लिए रोजगार और अवसर उत्पन्न करेगी।
कार्यक्रम में आयोजित मास्टर क्लास में विपणन रणनीतियों, ब्रांड निर्माण और ग्राहक अधिग्रहण के आधुनिक तरीकों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी, जिससे उपस्थित स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों को बाजार में सफलतापूर्वक स्थापित करने की दिशा में मार्गदर्शन मिला।
सांस्कृतिक प्रस्तुति और फायरसाइड चर्चाओं ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बनाया, जहां सफल उद्यमियों ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियों को साझा कर युवाओं को प्रेरित किया। समिट का सबसे आकर्षक हिस्सा “शार्क टैंक शैली” पिच सत्र रहा, जिसमें पंद्रह चयनित स्टार्टअप्स ने निवेशकों के सामने अपने नवाचार प्रस्तुत किए और संभावित निवेश के अवसर प्राप्त किए।
कार्यक्रम के दौरान महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन की घोषणा भी की गई, जिससे भविष्य में अधिक से अधिक महिलाओं को स्टार्टअप इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। समापन सत्र में पन्नीरसेल्वम मदनागोपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं और आने वाले समय में भारत नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक नेतृत्व करेगा।
कुल मिलाकर यह समिट न केवल विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच बना, बल्कि निवेश, नेटवर्किंग और सहयोग के नए अवसरों को जन्म देने में भी सफल रहा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जयपुर और राजस्थान आने वाले समय में भारत के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।




















