जयपुर। आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र की अष्टमी पर रविवार को विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। शिव योग, सिद्ध योग, रवि योग, जयद् योग में अष्टमी पर दस महाविद्या में मां बगलामुखी और मां दुर्गा के महागौरी रूप में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों में दुर्गा कवच पाठ, सप्तशती पाठ के साथ हवन होंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि दस महाविद्या में मां बगलामुखी की साधना दुश्मन के भय से मुक्ति और वाक् सिद्धि के लिए की जाती है। जो साधक गुप्त नवरात्रि में इनकी साधना करता है वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। महाभारत के युद्ध में कृष्ण और अर्जुन ने कौरवों पर विजय हासिल करने के लिए माता बगलामुखी की पूजा की थी।
मंदिरों में गुप्त साधना करने वाले साथ संकल्पित मंत्रों की महाष्टमी पर विशेष आराधना करेंगे। गुप्त नवरात्र का समापन पर मंदिरों में 15 जुलाई को श्रद्धालुओं द्वारा देवी का मनोरथ श्रृंगार किया जाएगा। दुर्गा कवच, सप्तशती पाठ किया जाएगा। घाटगेट श्मशान स्थित काली माता मंदिर में पुष्पाजंलि, सप्तशती मंत्र से जगत कल्याण के लिए आहुतियां दी जाएंगी। आमेर के शिला माता मंदिर में माता को प्रसाद और चुनरी चढ़ेगी।




















