होलाष्टक:शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर लगी रोक

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Holashtak starts from 17th March
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जयपुर। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से मंगलवार से होलाष्टक प्रारंभ हो गए हैं, जो 2 मार्च की रात्रि को होलिका दहन के साथ संपन्न होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह आठ दिवसीय अवधि विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस दौरान शुभ एवं मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि पर रोक रहती है।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दौरान आठों ग्रह उग्र अवस्था में माने जाते हैं। अष्टमी तिथि को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का प्रभाव अधिक रहता है। इस कारण इस अवधि में नकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि की संभावना मानी जाती है।

धार्मिक दृष्टि से होलाष्टक के दिनों में भगवान की आराधना, हवन-पूजन, मंत्र जाप एवं सेवा कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र एवं धन का दान करना पुण्यदायक माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धालुओं को इस अवधि में भक्ति, साधना और धार्मिक अनुष्ठानों में समय देने की प्रेरणा दी गई है।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार होलाष्टक के समय सभी प्रमुख ग्रहों के उग्र प्रभाव के कारण मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए तथा आध्यात्मिक साधना और सेवा कार्यों को प्राथमिकता देना लाभकारी माना जाता है। परंपरागत रूप से इस अवधि में यात्राएं टालने तथा नवविवाहिताओं को मायके में रहने की सलाह भी दी जाती रही है।

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