जयपुर। होलाष्टक समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर विवाह और मांगलिक आयोजनों की रौनक लौटने जा रही है। 24 फरवरी से होलाष्टक लगने के कारण विवाह समारोहों पर विराम लग गया था। तीन मार्च को होलाष्टक समाप्त होने के बाद अब 6 मार्च से शुभ कार्यों की शुरुआत होगी
।
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार 6 मार्च से लेकर 25 जुलाई तक, यानी देवशयन एकादशी तक विवाह समारोह संपन्न होंगे। इस अवधि में कुल 40 विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं। इनमें 8 अबूझ सावे भी शामिल हैं, जिनमें बिना पंचांग विचार के विवाह किए जा सकते हैं। विवाह के लिए पर्याप्त तिथियां उपलब्ध होने से मैरिज गार्डन, बैंक्वेंट हॉल और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी राहत मिलेगी।
मार्च माह के मुहूर्त:6, 9, 10, 11, 12 और 26 मार्च
अप्रैल में 9 मुहूर्त:19, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29, 30 अप्रैल
मई में 9 मुहूर्त:1, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 13, 14 मई
जून में 7 मुहूर्त:19, 20, 22, 23, 24, 26, 27, 29 जून
जुलाई में 9 मुहूर्त:3, 6, 7, 8, 9, 12, 22, 23, 25 जुलाई
प्रमुख अबूझ सावे:26 मार्च- राम नवमी,19 अप्रैल- अक्षय तृतीया,25 अप्रैल- जानकी नवमी,1 मई- पीपल पूर्णिमा,
24 जून- गंगा दशहरा,22 जुलाई- भड़ल्या नवमी और 25 जुलाई- देवशयन एकादशी है।




















