भक्ति में डूबा जयपुर: श्रीकृष्ण कथा में विरह और समर्पण का संदेश

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Jaipur Immersed in Devotion: The Message of Separation and Surrender in the Shri Krishna Katha
Jaipur Immersed in Devotion: The Message of Separation and Surrender in the Shri Krishna Katha

जयपुर। जयपुर में ओके प्लस समूह के बैनर तले समूह के चेयरमैन ओमप्रकाश मोदी व स्नेहलता मोदी की स्वर्ण जयंती वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बिड़ला सभागार में आयोजित श्रीकृष्ण कथा के अंतिम दिन भक्ति, भाव और रस का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूज्य पुण्डरीक गोस्वामी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के गूढ़ और भावुक प्रसंगों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

कथा के समापन अवसर पर रासलीला रहस्य, गोपी गीत, उद्धव चरित्र और कृष्ण-रुक्मणी विवाह जैसे प्रसंगों का मार्मिक वर्णन हुआ। इन प्रसंगों को सुनकर सभागार में मौजूद भक्त भक्ति की मस्ती में झूम उठे और पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।

महाराज ने कहा कि रासलीला कोई सांसारिक क्रीड़ा नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का सर्वोच्च उत्सव है। उन्होंने बताया कि भगवान के अंतर्ध्यान होने पर गोपियों के विरह से उपजा ‘गोपी गीत’ केवल विलाप नहीं, बल्कि शरणागति की पराकाष्ठा का प्रतीक है। भगवान की प्राप्ति अहंकार त्याग से ही संभव है।

उद्धव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि परम ज्ञानी उद्धव भी ब्रज की गोपियों के निस्वार्थ प्रेम के आगे नतमस्तक हो गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर को केवल शास्त्र ज्ञान से नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और भाव से पाया जा सकता है।

कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग पर महाराज ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा थीं। जब उनका विवाह शिशुपाल से तय हुआ, तब उन्होंने अपने आराध्य श्रीकृष्ण को गुप्त संदेश भेजा। यह प्रसंग अटूट विश्वास और समर्पण की शक्ति को दर्शाता है, जिसमें भगवान स्वयं भक्त की रक्षा के लिए उपस्थित होते हैं।

कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर मंगल गीत गाए और भक्ति भाव से झूमकर नृत्य किया। महाराज ने कहा कि भक्ति वह मार्ग है, जहां तर्क समाप्त होता है और समर्पण प्रारंभ होता है।

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