जयपुर। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन माता सीता का जन्मोत्सव मनाया जाता हैं। इस दिन माता जानकी की वृद्धि योग में विधिवत पूजा की जाएगी । इस बार जानकी जयंती और कालाष्टमी दोनों ही आज सोमवार को मनाएं जाएंगे । आचार्य गौरी शंकर शर्मा बोरखेड़ा ने बताया कि माता सीता को त्याग, प्रेम,धैर्य और मर्यादा की प्रतीक माना गया हैं । इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता जानकी की पूजा-अर्चना करके सुख-समृद्धि व वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हैं ।
कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा करने से भय,नकारात्मकता और शत्रुओं से मुक्ति मिलती हैं। जानकी जयंती के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं । माता जानकी और काल भैरव की पूजा-अर्चना करने का श्रेष्ठ समय सुबह 09:52 से 11:15 तक हैं । प्रातः काल उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें । घर के मंदिर को साफ करके एक चौकी पर लाल और पीला कपड़ा बिछाएं । इसके बाद माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा स्थापित करके और माता को लाल चुनरी,बिंदी, चूड़ियां और सुहाग की सामग्री अर्पित करके पूजा-अर्चना करें तत्पश्चात आरती करके प्रसाद ग्रहण करें ।




















