जयपुर। श्री गीता गायत्री जी में पंडित राजकुमार चतुर्वेदी के सानिध्य में संकट चतुर्थी के शुभ अवसर पर झूला महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर प्रवक्ता नीतीश चैतन्य चतुर्वेदी ने बताया कि इस अवसर पर प्रथम पूज्य गणेश जी महाराज श्याम बाबा लड्डू गोपाल जी मंदिर के सभी विग्रहों कालड्डू पंचामृत से अभिषेक विभिन्न तीर्थस्थलों के जल से किया गया। इसके उपरांत भगवान को नवीन पोशाक धारण कराकर झूले में विराजित कराया गया।
महोत्सव के दौरान भक्तों द्वारा भक्ति भाव से झूले के पद एवं भजन गाए गए, जिनमें “झूला झूल रहे नंदलाल”, “माता मेरी झूला झूले”, “वृंदावन में उड़े रे गुलाल”, “राधा झूला झूल रही”, “झूला झूले हो गजानन झूलना”, “झूला झूल रहे भगवान नंद जी के आंगन में”, “झूला झूल रहे घनश्याम नंद जी के आंगन में” तथा “मेरा लाल झूले पलना नेक होले छोटा दीजो” जैसे भक्ति गीत शामिल रहे। इन भजनों के साथ भक्तों ने श्रद्धा और उल्लास के साथ ठाकुर जी को झूला झुलाया।
कार्यक्रम के दौरान भगवान गिरधर गोपाल के साथ फूलों की होली भी खेली गई, जिससे वातावरण भक्तिमय और आनंदमय हो गया। इस आयोजन में चमत्कारेश्वर महिला मंडल का विशेष योगदान रहा। पुरानी प्राचीन परंपराएं होली के बाद ठाकुर जी को झूले में जलाया जाता है ताकि होली के फाग उत्सव की थकान उतरी जा सके।
छोटीकाशी के कई मंदिरों में झूला महोत्सव का हुआ आयोजन
संकट चतुर्थी पर शुक्रवार को छोटीकाशी के कई मंदिरों में फूल डोल या झूला महोत्सव मनाया गया। विग्रहों का पंचामृत से अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई। इसके बाद फूलों के झूले में विराजित कराया गया। इस मौके पर झूला झूल रहे नंदलाल…, माता मेरी झूला झूले…, राधा झूला झूल रही…, झूला झूले हो गजानन झूलना…जैसे पद और भजन गाए गए।
गलता गेट स्थित गीता गायत्री मंदिर में प्रथम पूज्य गणेश महाराज, श्याम बाबा, लड्डू गोपाल जी सहित सभी विग्रहों के अभिषेक-श्रृंगार के बाद झूला उत्सव मनाया गया। भक्तों ने गिरधर गोपाल के साथ फूलों की होली भी खेली। चमत्कारेश्वर महिला मंडल की महिलाओं ने भजनों पर जमकर नृत्य किया। उल्लेखनीय है कि फाल्गुन माह में ठाकुर जी लगातार होली खेलने से थक जाते हैं ऐसे में उन्हें फूलों के मध्य विराजमान कर फूल डोल महोत्सव मनाया जाता है।




















