खरमास समाप्त: अब गूंजेगी शहनाई, होंगे मांगलिक कार्य

जयपुर। 14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के बाद खरमास खत्म होते ही विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। वैसे खरमास 13 अप्रैल को ही खत्म हो गए हैं। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास यानी मीन महीना खत्म हो जाता है। इससे पहले 14 मार्च को सूर्य के मीन राशि में आने के बाद मीन मास चल रहा था। खरमास होने के कारण पिछले एक महीने से हर तरह के मांगलिक कामों पर रोक लगी हुई थी। लेकिन अब इनके लिए मुहूर्त रहेंगे।

ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि जब सूर्य मीन राशि में रहता है तब इन दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। अब शुभ मुहूर्त और शुभ दिन में अन्नप्राशन, नामकरण, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ और अन्य संस्कार किए जा सकेंगे। सूर्य के मेष राशि में आते ही गृह प्रवेश और विवाह के भी मुहूर्त रहेंगे। अब देवगुरु बृहस्पति भी खुद की राशि यानी मीन में आ गए हैं। जिससे हर मांगलिक कामों में गुरु का बल और बढ़ जाएगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि अप्रैल में विवाह सहित मांगलिक कार्यों के लिए केवल 10 दिन ही मिलेंगे। 17से 26 और 28 अप्रैल विवाह के लिए बेहद ही शुभ हैं। मलमास समाप्ति के बाद पहला सावा 17 अप्रैल रामनवमी का रहेगा। इसके बाद अप्रैल में महज 5 सावे 18, 21, 22, 23 और 26 अप्रैल को है। सर्वाधिक शादियां 21 अप्रैल को है।

मई-जून में अस्त रहेंगे गुरु-शुक्र: मिश्रा ने बताया कि विवाह मुहूर्त में गुरु और शुक्र अस्त का भी विचार किया जाता है। अच्छा शुक्र भोग विलास का नैसर्गिक कारक है और दांपत्य सुख को दर्शाता है। वहीं, गुरु कन्या के लिए पति सुख का कारक है। दोनों ग्रहों का शुभ विवाह के लिए उदय होना शास्त्र सम्मत है। विवाह के लिए शुक्र और गुरु ग्रह का उदित रहना जरूरी है। दोनों ग्रह विवाह के कारक हैं। इनके अस्त रहने पर विवाह नहीं होते हैं।

ऐसे में 23 अप्रैल को शुक्र ग्रह दोपहर में अस्त हो जाएगा, जो 29 जून तक अस्त रहेगा। वहीं, 6 मई से गुरु ग्रह भी अस्त हो जाएगा, जो 2 जून को उदित होगा, परंतु शुक्र अस्त ही रहेगा। इस कारण से मई और जून माह में विवाह की शहनाई नहीं बजेंगी। सर्वाधिक मुहूर्त अगले साल फरवरी में 20 दिन रहेंगे। सबसे कम 5-5 दिन अप्रैल और अक्टूबर में होंगे। इससे पूर्व वर्ष 2000 में भी मई-जून में शुक्र और गुरु ग्रह के अस्त रहने पर विवाह मुहूर्त नहीं थे। इससे भी पहले 1996 में मई से जुलाई के बीच इन तीन माह में केवल 5 दिन मुहूर्त निकले थे।

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