होलाष्टक में विवाह-सगाई पर लगेगा विराम: मंदिरों में होंगे विशेष अनुष्ठान

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Marriage and engagement will be stopped during Holashtak.
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जयपुर। फाल्गुन मास में होली से पूर्व आने वाले होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ होने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इस अवधि में विवाह,गृह प्रवेश,मुंडन,सगाई,नया व्यवसाय प्रारंभ करना जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। होलिका दहन के साथ ही यह अवधि समाप्त हो जाती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दिनों में ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है। जिससे वातावरण में नकारात्मकता बढ़ती है। इसलिए इन दिनों में जप-तप,दान-पुण्य और साधना को विशेष महत्व दिया गया है। श्रद्धालु भगवान विष्णु और भक्त प्रहलाद की कथा का स्मरण करते हुए भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करते हैं।

ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि होलाष्टक में विशेष रूप से मंगल,शनि और राहु के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। हालांकि दैनिक पूजा-पाठ और नियमित कार्यों पर कोई रोक नहीं होती।

उधर मंदिरों में होलाष्टक के दौरान विशेष पूजा-अनुष्ठान की तैयारियां शुरू हो गई हैं। धर्माचार्यों ने लोगों से इस अवधि में संयम, सत्संग और सेवा कार्यों में भाग लेने की अपील की है। होलिका दहन के साथ ही शुभ कार्यों का सिलसिला पुनः प्रारंभ हो जाएगा और इसके बाद विवाह व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की तिथियां पुनः सक्रिय हो जाएंगी।

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