जयपुर। विकास समिति निर्माण नगर सी-ब्लॉक में आयोजित नानी बाई रो मायरा कथा में भक्ति, भाव और वैभव का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा के दौरान श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत वातावरण में 56 करोड़ का मायरा भरे जाने का दिव्य प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा व्यास पंडित उमेश व्यास ने व्यास पीठ से नरसी भक्त और सांवरिया सेठ के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि कैसे द्वारकाधीश ने अपने परम भक्त नरसी मेहता की हुंडी स्वीकार कर उनका मान बढ़ाया। व्यास ने कलयुग की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चारों युगों में कलयुग सबसे अधिक लाभकारी युग है, जहां केवल भगवान के नाम जप मात्र से ही कृपा प्राप्त हो जाती है। अन्य युगों—सतयुग, त्रेता और द्वापर—में जहां कठोर तप, साधना, यज्ञ और अनुष्ठान आवश्यक थे, वहीं कलयुग में नाम ही आधार है।
उन्होंने कहा कि हर जीव में परमात्मा के दर्शन करने चाहिए और हर जीव की सेवा ही भगवान की सेवा है—चाहे वह पशु-पक्षी हों, वृक्ष-वनस्पति हों या दीन-दुखियों की सेवा। माता-पिता और गुरुजनों की सेवा को उन्होंने सच्ची सेवा बताया।
यज्ञ और हवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित उमेश व्यास ने कहा कि यज्ञ-हवन से जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है, पितृ देव प्रसन्न होते हैं, वातावरण शुद्ध होता है और यह रोग निवारण की श्रेष्ठ औषधि है। यज्ञ से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
कथा के तृतीय दिवस पर गलता पीठ से अवधेश आचार्य जी महाराज, विधायक गोपाल शर्मा एवं पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने कथा की सराहना करते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।
कथा का समापन नानी बाई रो मायरा के भावपूर्ण प्रसंग एवं भव्य भंडारे के साथ हुआ। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ प्रसादी ग्रहण की और आयोजन को अविस्मरणीय बताया।



















