जेएलएफ में नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी का दो टूक,करुणा के बिना विकास अधूरा

0
24
Nobel laureate Kailash Satyarthi's blunt statement at JLF.
Nobel laureate Kailash Satyarthi's blunt statement at JLF.

जयपुर। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के मंच से मानवता,समाज और वैश्विक हालातों पर गहन चिंता जताते हुए कहा कि करुणा के बिना न तो समाज सुरक्षित रह सकता है और न ही लोकतंत्र व अर्थव्यवस्था। कैलाश सत्यार्थी शनिवार को अपनी नई किताब करुणा पर चर्चा के लिए जेएलएफ पहुंचे थे।

सत्यार्थी ने कहा कि करुणा हम सभी के भीतर मौजूद है,लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा, आक्रामकता और संवेदनहीनता के कारण वह हाशिये पर चली गई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी सुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि करुणा केवल इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए,बल्कि सभी जीवों के प्रति संवेदनशीलता हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कंपैशन ज्यूडिशियरी की अवधारणा रखते हुए कहा कि आज देश को करुणामई न्यायपालिका, राजनीति,मीडिया और यहां तक कि कॉर्पोरेट सेक्टर में भी करुणामई लीडरशिप की आवश्यकता है।

तकनीक और मानव मूल्यों के रिश्ते पर बोलते हुए सत्यार्थी ने एक भविष्यवादी विचार साझा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया में करुणा मापने वाला ऐप भी संभव है। जो यह बताएगा कि किसी व्यक्ति के भीतर संवेदना और सहानुभूति का स्तर कितना है। उन्होंने इसे डिजिटल युग में गिरते मानवीय मूल्यों के बीच आत्ममंथन का आईना बताया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है। वह केवल किसी एक व्यक्ति या आंतरिक घटनाक्रम तक सीमित नहीं है। बल्कि इसके पीछे बाहरी ताकतें भी सक्रिय हैं। यह स्थिति न केवल समाज और इंसानों के लिए, बल्कि वहां की इकॉनमी के लिए भी नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि पूरे संकट का समाधान केवल नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस पर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा।

सत्यार्थी ने कहा कि करुणा केवल भावनात्मक विषय नहीं,बल्कि सामाजिक स्थिरता, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक संतुलन की बुनियाद है। यदि समाज, सत्ता और तकनीक के केंद्र में करुणा को रखा जाए तो वर्तमान दौर की कई वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here