जयपुर। पौष माह की शुरुआत हो गई। पंचांग के अनुसार यह महीना हेमंत ऋतु में आता है, इसलिए मौसम में ठंड अधिक रहती है। इसलिए मंदिरों में ठाकुरजी को विभिन्न तरह की दाल का मेवा मिश्रित खीचड़े का भोग लगाया गया। पौष माह के पहले पखवाड़े में रोजाना ठाकुरजी को दाल के खीचड़े का भोग लगाया जाएगा। वहीं दूसरे पखवाड़े में दाल के बड़े और हलवे का भोग लगाया जाएगा।
पौष माह में सूर्यदेव की विशेष पूजा का महत्व बताया गया है। पौष में सूर्य की गति मंद पडऩे से खरमास भी कहा जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। पितरों की शांति के लिए इस महीने में पिंडदान और श्राद्ध कर्म करना भी शुभ माना जाता है। करना ही उचित माना गया है। ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि पौष माह का समापन 3 जनवरी 2026 को होगा। इस माह सूर्यदेव को तिल और चावल से बनी खिचड़ी का भोग लगाना शुभ माना गया है। पौष मास के हर रविवार व्रत रखकर सूर्यदेव की आराधना करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और सौभाग्य बढ़ता है।
इसके अलावा पौष माह में आदित्य हृदय स्तोत्र के नित्य पाठ करना चाहिए। इससे जीवन में अनेक कष्टों का निवारण होता है। पौष माह की अमावस्या, संक्रांति, पूर्णिमा, एकादशी पर सूर्यदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए। इससे पितृदोष में कमी आती है।
दान से संवरेगी किस्मत
शर्मा ने बताया कि इस माह में दान का विशेष महत्व बताया गया है। गर्म कपड़े, कंबल, गुड़, दाल, तांबे के बर्तन का दान करने से जीवन में सदैव सुख और शांति बनी रहती है। इस पूरे महीने श्री हरि विष्णु के नामों का जाप भी शुभ माना गया है। पौष माह को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है। इसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किया जाता है। पौष माह में स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए रोजाना सूर्य को अघ्र्य देना अत्यंत फलदायी है। इससे काया निरोगी रहती है और लंबी आयु की प्राप्ति होती है।




















