जयपुर। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया गुरुवार को फुलेरा दूज के रूप में मनाई जाएगी। यह दिन होली पर्व के आगमन का प्रतीक माना जाता है और इसी दिन से होली की तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इस दिन होली स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से लकड़ी या उपले रखे जाते हैं तथा गोबर की गुलरियां बनाने की परंपरा भी शुरू होती है।
ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल द्वितीया तिथि 18 फरवरी को दोपहर 4:57 बजे आरंभ हो गई जो 19 फरवरी को शाम 3:58 बजे समाप्त होगी। सनातन परंपरा में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए 19 फरवरी को फुलेरा दूज का पर्व मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, संपत्ति क्रय, व्यवसाय आरंभ जैसे सभी मांगलिक कार्य होंगे। गुरुवार को बड़ी संख्या में विवाह होंगे। सर्दियों में शादियों के मौसम का यह अंतिम प्रमुख शुभ दिन है। यह तिथि दांपत्य जीवन के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इस दिन विवाह करने वाले दंपतियों को सुख-समृद्धि और प्रेमपूर्ण वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मंदिरों में होगी फूलों से सजावट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फुलेरा दूज का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम से जुड़ा है। इस दिन मंदिरों और घरों में फूलों से विशेष सजावट की जाती है तथा रंग-बिरंगे फूलों से होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण को विशेष भोग अर्पित करते हैं, जिसमें पोहा सहित विभिन्न व्यंजन शामिल होते हैं, जिन्हें बाद में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
फुलेरा दूज पर घरों और मंदिरों को फूलों और रंगोली से सजाकर उत्सव मनाया जाता है तथा होली पर्व के स्वागत की तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं।




















