शाही ठाठ-बाट से निकली गणगौर माता की शोभायात्रा

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जयपुर। जयपुर की विश्व प्रसिद्ध गणगौर की शोभायात्रा को देखने के लिए शनिवार को जयपुरवासी उमड़ पड़े। चारदीवारी पूरी तरह गणगौर और ईसर के रंग में रंग गई।  पहली बार 210 लोक कलाकारों के अलग-अलग समूह ने लोक कला की ऐसी रंगत बिखेरी कि दर्शक निहारते ही रहे। वहीं 32 पारंपरिक लवाजमों के भव्य संयोजन ने गणगौर माता की शाही सवारी में चार चांद लगा दिए।

पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि लोक कला और परंपरा की जुगलबंदी ने शहरवासियों और पर्यटकों को आनंदित कर दिया। सिटी पैलेस में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और पूर्व राजपरिवार की महिलाओं ने गणगौर माता का विधिवत पूजन किया। इसके बाद जनानी ड्योढ़ी से शाही सवारी में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज, लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों और बैंड की स्वर लहरियों के साथ लाल वस्त्रधारी कहार माता को कंधों पर उठाकर त्रिपोलिया गेट से चौड़ा रास्ता पहुंचे।

शाही परंपरा के अनुसार गणगौर माता चलायमान सिंहासन पर विराजमान रही। यहां गणगौर माता के दर्शन के लिए काफी देर से खड़े श्रद्धालुओं ने जयकारों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया।  सजी-धजी झांकियों और पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित कलाकारों ने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मार्ग के दोनों ओर एकत्र होकर माता के दर्शन करते नजर आए।

गणगौर माता का श्रृंगार आकर्षण का केन्द्र रहा। माता को लगभग 1.5 किलो के मुकुट, 150 ग्राम के मांग टीका, 900 ग्राम के चंपाकली हार सहित पारंपरिक शाही आभूषणों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही बाजूबंद, हथफूल, कंठी और कमरबंध जैसे आभूषणों ने माता के स्वरूप को और अधिक दिव्य एवं भव्य बना दिया। रत्नों से जड़े इन आभूषणों ने राजसी परंपरा और कारीगरी की उत्कृष्ट झलक प्रस्तुत की।

यह शोभायात्रा सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से प्रारंभ होकर छोटी चौपड़ पहुंची तो उसकी भव्यता देखते ही बन रही थी। लवाजमे का एक छोर जहां छोटी चौपड़ था तो दूसरा छोर त्रिपोलिया गेट था। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने कलश धारण कर मंगल गीतों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर गणगौर की सवारी का स्वागत किया गया। तालकटोरा में गणगौर को पानी  पिलाया गया। रविवार को बूढ़ी गणगौर की सवारी निकाली जाएगी।

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