रौद्र संवत्सर’ का आरंभ 19 मार्च से

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जयपुर। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ होगा। वर्ष भर होने वाले धार्मिक संकल्प, पूजा-पाठ और अनुष्ठानों में संकल्प संवत्सर के रूप में ‘रौद्र’ नाम का उच्चारण किया जाएगा। नवसंवत्सर के साथ ही चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होगा, जो शक्ति उपासना का प्रमुख पर्व है। भारतीय पंचांग के अनुसार इसी दिन से नव संवत्सर का आरंभ माना जाता है, जिसे सृष्टि के नवचक्र की शुरुआत का प्रतीक भी कहा गया है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष ब्रह्मांडीय व्यवस्था में विशेष परिवर्तन होगा तथा देव गुरु बृहस्पति सृष्टि की सत्ता के प्रमुख अधिष्ठाता माने जाएंगे। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार संवत 2083 का नाम ‘रौद्र संवत्सर’ होगा, जिसका स्वभाव तीव्र और परिवर्तनकारी माना जाता है। रौद्र संवत्सर का प्रभाव प्राकृतिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। इस दौरान मौसम में असंतुलन की स्थिति बन सकती है।

गर्मी के मौसम में कहीं अत्यधिक तापमान और लू का प्रकोप देखने को मिल सकता है, वहीं कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। इसके विपरीत कुछ स्थानों पर अल्पवर्षा या सूखे की स्थिति भी बन सकती है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे आंधी-तूफान, भूकंप और अतिवृष्टि की घटनाओं में वृद्धि की आशंका भी जताई जा रही है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. मिश्रा के अनुसार रौद्र संवत्सर में मंत्री पद पर मंगल देव का प्रभाव रहेगा। मंगल को उग्रता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दौरान हिंसा और अपराध की घटनाओं में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। लोगों के स्वभाव में क्रोध और आवेश बढ़ सकता है तथा रक्त संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढऩे की आशंका है। हालांकि ग्रहों की संतुलित स्थिति के कारण परिस्थितियां पूरी तरह अनियंत्रित नहीं होंगी और नियंत्रण बना रहेगा।

जप-तप ही एकमात्र आसरा

हालांकि ज्योतिष शास्त्र में यह भी बताया गया है कि धार्मिक अनुष्ठान, जप-तप, हवन, दान-पुण्य तथा सत्कर्मों के माध्यम से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। नव संवत्सर के दिन विशेष रूप से देवी-देवताओं की पूजा का महत्व बताया गया है। विद्वानों का मानना है कि आध्यात्मिक साधना और सकारात्मक कर्मों से प्रकृति में संतुलन स्थापित होता है तथा समाज में सुख, समृद्धि और शांति का वातावरण बना रहता है।

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