जयपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) की ओर से आयोजित पांच दिवसीय शिव आराधना के चतुर्थ दिवस का आयोजन मंगलवार को जेडी पैराडाइज, आगरा रोड जयपुर में हुआ। इस अवसर पर पार्वती जन्मोत्सव एवं काम-दहन प्रसंग के माध्यम से नारी सम्मान, आत्मसंयम और सामाजिक संतुलन का गूढ़ आध्यात्मिक संदेश दिया गया। कथा व्यास साध्वी लोकेशा भारती ने कहा कि माता पार्वती शक्ति, तप, त्याग और संतुलन की प्रतीक हैं तथा समाज में नारी शक्ति के सम्मान और स्वीकार्यता के बिना वास्तविक संतुलन संभव नहीं है।
उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या, घरेलू भेदभाव और नारी शोषण को सामाजिक विकृति बताते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा जब घर-घर में कन्या का सम्मान होगा। काम-दहन प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए साध्वी ने कहा कि ‘काम’ हर वह विकार है जो विवेक और मानवीय मूल्यों को नष्ट करता है, और भगवान शिव द्वारा काम-दहन आत्मसंयम व चेतना जागृति का प्रतीक है।
उन्होंने दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज द्वारा प्रदत्त दिव्य दृष्टि और डीजेजेएस के “संतुलन” प्रकल्प का उल्लेख करते हुए इसे नारी सम्मान और सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। कार्यक्रम में भजन, कथा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण भक्तिमय रहा।




















