जयपुर। चांदपोल बाजार स्थित श्री रामचंद्र जी मंदिर में मनाए जा रहे सात दिवसीय श्रीराम-जानकी विवाह मंगल महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को पुष्प वाटिका का प्रसंग हुआ। सीताजी ने गौरी पूजन किया। प्रसंगानुसार मंदिर जगमोहन को जनक बाग के रूप में फूलों से सजाया गया। गमले, घास, पुष्पों की क्यारियां एवं विभिन्न प्राकृतिक सजावट ने अद्भुत छटा बिखेरी।
एक ओर भगवान श्रीराम-लक्ष्मणजी का दरबार सुसज्जित था, तो दूसरी ओर माता सीताजी अपनी सखियों संग गौरी माता पूजन के लिए विराजमान हुईं। भक्त समाज ने इस अलौकिक प्रसंग का मंचन भजन रूप में किया। भजनों के भावों ने उस क्षण का जीवंत चित्रण किया जब फूल तोड़ते समय सीताजी की दृष्टि श्रीरामजी पर पड़ती है और वे उन्हें अपने वर के रूप में स्वीकार करती हैं।
लता ओट तब सखिन्ह लखाए स्यामल गौर किसोर सुहाए, देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने चौपाई ने प्रसंग को जीवंत कर दिया। इसके बाद गौरी माता से श्रीराम को अपने वर रूप में पाने की प्रार्थना करते हुए सीताजी का यह भावपूर्ण पूजन अत्यंत भावविभोर करने वाला रहा। मंदिर महंत नरेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि 7 नवंबर को धनुष पूजन एवं विवाह निमंत्रण का प्रसंग होगा।




















