कलश यात्रा के साथ मुरलीपुरा में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

0
47
Shri Shrimad Bhagavat Katha Commences in Murlipura with a Kalash Yatra
Shri Shrimad Bhagavat Katha Commences in Murlipura with a Kalash Yatra

जयपुर। मुरलीपुरा स्थित अर्चना नगर में रविवार को भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। क्षेत्र में धार्मिक वातावरण के बीच बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

कलश यात्रा देव नगर स्थित श्री शिव मंदिर से गाजे-बाजे और जयकारों के साथ रवाना हुई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए अर्चना नगर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कलश यात्रा के पश्चात संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ, जिसमें पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म, भक्ति और ज्ञान का लाभ प्राप्त किया। कथा का वाचन आचार्य प्रेमनारायण भारद्वाज द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने अपने प्रवचनों से श्रोताओं को आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

आचार्य प्रेमनारायण भारद्वाज ने श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह ग्रंथ केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य मार्गदर्शक है।उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत का आरंभ नैमिषारण्य में ऋषियों के समागम से होता है, जहां सूत जी महाराज से कलियुग में मानव कल्याण का मार्ग पूछा जाता है। इसके उत्तर में भागवत कथा का प्राकट्य होता है, जो भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का समन्वय है।

आचार्य ने कहा कि जब-जब मानव जीवन में मोह, अहंकार और दुख बढ़ते हैं, तब श्रीमद् भागवत ही आत्मा को शांति और परमात्मा से जुड़ने का मार्ग दिखाती है। उन्होंने श्रोताओं को समझाया कि कथा श्रवण मात्र से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। प्रथम दिवस पर उन्होंने भक्ति की महिमा और सत्संग के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान के जयकारे लगाए और नियमित रूप से कथा श्रवण का संकल्प लिया। आयोजन समिति के अनुसार, कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए स्थानीय निवासियों ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here