एन एच -48 पर अब स्मार्ट कैमरों का पहरा: शाहजहांपुर से अजमेर तक हाईटेक चालान व्यवस्था शुरू

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जयपुर । राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के शाहजहांपुर से अजमेर खंड पर अब आधुनिक यातायात प्रवर्तन प्रणाली को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। इस पहल के माध्यम से अब हाई-वे पर नियमों को तोड़ने वालों पर कैमरों के जरिए नजर रखी जाएगी।

27 स्थानों पर लगी तीसरी आँख

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यातायात बी एल मीणा ने बताया कि इस पूरे मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए उन्नत तकनीक का सहारा लिया गया है। हाईवे पर 27 महत्वपूर्ण स्थानों पर गैंट्री आधारित प्रवर्तन इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। ये इकाइयां उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और इंटेलिजेंट एनालिटिक्स से लैस हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी भी मानवीय हस्तक्षेप के बिना, वास्तविक समय में यातायात नियमों के उल्लंघन को पहचानने में सक्षम है।

हाथों-हाथ मोबाइल पर पहुंचेगा ई-चालान

इस नई प्रणाली के तहत अब चालान काटने के लिए पुलिस को वाहन रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। जैसे ही कोई कैमरा किसी नियम का उल्लंघन दर्ज करेगा, सिस्टम स्वचालित रूप से मोटर वाहन अधिनियम के तहत ई-चालान तैयार कर देगा। यह ई-चालान सीधे वाहन स्वामी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज दिया जाएगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि यातायात संचालन में भी कोई बाधा नहीं आएगी।

इन 7 गंभीर गलतियों पर होगी सीधी कार्रवाई

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह हाईटेक सिस्टम मुख्य रूप से सात प्रकार के उल्लंघनों पर नजर रखेगा। इनमें निर्धारित सीमा से अधिक गति (ओवरस्पीडिंग), बिना हेलमेट वाहन चलाना, दोपहिया पर तीन सवारी, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग, सीट बेल्ट न लगाना, लेन का उल्लंघन करना और गलत दिशा में वाहन चलाना शामिल हैं। इन सभी गलतियों को कैमरे तुरंत कैद कर लेंगे।

मकसद सिर्फ सुरक्षा, दंड नहीं

एडीजी मीणा ने इस पहल के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था दंडात्मक न होकर सुरक्षात्मक है। इसका मुख्य लक्ष्य राजमार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाना और नागरिकों में यातायात अनुशासन की भावना पैदा करना है। एडीजी ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे नियमों का कड़ाई से पालन करें, ताकि वे भारी जुर्माने से बच सकें और अपना व दूसरों का जीवन सुरक्षित रख सकें।

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