डमी कैंडिडेट पकड़ने के लिए एसओजी ने सॉफ्टवेयर से 50 लाख अभ्यर्थियों का डाटा खंगाला

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जयपुर। सरकारी भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट बैठाकर नौकरी पाने के मामलों पर शिकंजा कसने के लिए राजस्थान पुलिस स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फेशियल रिकग्निशन तकनीक से लैस इस सॉफ्टवेयर की मदद से लाखों अभ्यर्थियों के डाटा का मिलान कर फर्जी परीक्षार्थियों की पहचान की जा रही है। अब तक 50 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड खंगाल कर दो हजार से ज्यादा संदिग्धों का पूरा डाटा तैयार किया जा चुका है।

एडीजी एसओजी विशाल बंसल के अनुसार इस सॉफ्टवेयर को सरकारी परीक्षाओं में उपयोग होने वाले एसएसओ आईडी और वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) के डाटाबेस से जोड़ा गया है। इसमें एआई आधारित फोटो मैचिंग टूल और फेशियल रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने वाले डमी कैंडिडेट की पहचान संभव हो सकी है। हाल ही में इसी तकनीक की मदद से सीनियर टीचर भर्ती-2022 मामले में तीन एमबीबीएस छात्र और दो सरकारी शिक्षक सहित कई लोगों को पकड़ा गया है।

दरअसल दिसंबर 2022 में वरिष्ठ शिक्षक भर्ती परीक्षा के सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान विषय का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा निरस्त कर जनवरी 2023 में दोबारा आयोजित की गई थी। उसी दौरान 14 अभ्यर्थियों के खिलाफ डमी कैंडिडेट बैठाने की शिकायत मिली थी। एसओजी ने वर्ष 2023 में मामला दर्ज कर 12 मूल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उनकी जगह परीक्षा देने वाले कई डमी कैंडिडेट की पहचान नहीं हो पाई थी। क्योंकि फॉर्म भरते समय मूल अभ्यर्थियों की जानकारी भरी गई थी, जबकि फोटो डमी कैंडिडेट की लगाई गई थी। एडमिट कार्ड पर वही फोटो होने के कारण परीक्षा केंद्रों पर भी वे पकड़ में नहीं आए थे।

बाद में आईजी शरत कविराज ने विशेषज्ञों की मदद से यह विशेष सॉफ्टवेयर तैयार कराया। एसओजी के पास वर्ष 2018 से अब तक आयोजित विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में शामिल 50 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का डाटा उपलब्ध था। संदिग्ध डमी कैंडिडेट की फोटो अपलोड कर इस डाटा से मिलान कराया गया तो सॉफ्टवेयर ने कुछ ही समय में उनकी पहचान कर दी। इसके बाद 16 फरवरी को अंडमान, कोलकाता, जालोर, कोटा और जयपुर सहित छह स्थानों पर दबिश देकर पांच इनामी डमी कैंडिडेट और एक संदिग्ध एमबीबीएस छात्र को गिरफ्तार किया गया।

डीआईजी एसओजी पारिस देशमुख ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर लाखों तस्वीरों को स्कैन कर लेता है और यदि किसी व्यक्ति का चेहरा 70 प्रतिशत तक भी मेल खाता है तो उसे पहचान लेता है। समय के साथ चेहरे में आए बदलाव, हेयरकट या रंग बदलने जैसी स्थितियों में भी यह तकनीक व्यक्ति को चिन्हित करने में सक्षम है।

एसओजी ने चेतावनी दी है कि अब यदि कोई व्यक्ति पैसों के लालच में किसी और की जगह परीक्षा देने का प्रयास करेगा तो वह देर-सबेर इस तकनीक की पकड़ में आ जाएगा। एजेंसी अब पिछली भर्ती परीक्षाओं की भी जांच कर रही है ताकि डमी कैंडिडेट और उनसे लाभ लेने वाले मूल अभ्यर्थियों का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।

अब तक 145 से अधिक डमी कैंडिडेट गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करीब दो हजार संदिग्धों का विस्तृत डाटा तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से सभी आवेदकों की फोटो और हस्ताक्षर का मिलान कर भविष्य में भी भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है।

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