शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व

जयपुर। इस बार आश्विन माह खत्म होते ही दूसरे दिन 29 अक्टूबर को कार्तिक मास शुरू होने जा रहा है इस साल शरद पूर्णिमा की रात 1 बजकर 4 मिनट से चंद्र ग्रहण शुरू होगा। लेकिन ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इस कारण यहां पर सूतक नहीं रहेगा।

शरद पूर्णिमा से जुडी हुई कई मान्यताएं है । बताया जाता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती है, वहीं दूसरी मान्यता ये है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इसकी तिथि पर गोपियों संग महारास रचाया था। बताया जाता है कि माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करते समय पूछती है कि कौन जाग रहा है। इसलिए आश्विन पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा को आयुर्वेद मे भी काफी महत्व है । इस रात चंद्र की रोशनी में औषधी गुणों से भरपूर होती है। इस कारण शरद पूर्णिमा की रात चंद्र की रोशनी में खीर बनाने की परम्परा है। लेकिन इस बार चंद्र ग्रहण होने के कारण ये परम्परा निभाने परेशानी आएगी। लेकिन ग्रहण खत्म होने के बाद इस परम्परा को निभाया जा सकता है।

खीर बना कर खाने के पीछे की वजह ये है कि मौसम परिवर्तन के कारण शीत ऋतु का असर बढ़ने लगता है इस दिन गर्म तासीर वाली चीजें खाने से ठंड से लड़ने की शक्ति मिलती है। शरद पूर्णिमा के लिए कहा जाता है कि इस रात को श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ वृंदावन में महारासलीला रचाई थी। इसलिए इस रात को वृंदावन में कई विशेष कार्यक्रम का आयोजन होता है।

इसे रासलीला रात भी कहा जाता है।इस तिथि पर चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं के साथ दिखाई देता है। चंद्र अन्य पूर्णिमा तिथियों की अपेक्षा इस पूर्णिमा पर कुछ ज्यादा बड़े आकार में दिखाई देगा। ग्रहण के समय माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप करने का खास महत्व है।

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