जयपुर। राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन 2026 के पहले दिन गुरुवार को दिनभर विभिन्न सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुलिस एवं आरपीए निदेशक संजीव कुमार नार्जरी रा ने बताया कि विकसित भारत में पुलिसिंग विषय पर राजस्थान पुलिस अकादमी में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में दिनभर पुलिस संबंधित विविध विषयों पर चर्चा की गई।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में राजेश कुमार आईपीएस तेलंगाना केडर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नई दिल्ली द्वारा साईबर अपराध पर विस्तृत जानकारी देते हुए इसकी पहचान व रोकथाम के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने साईबर अपराध के मामलों में राजस्थान पुलिस का चालान प्रतिशत देश में प्रथम स्थान पर 32 प्रतिशत बताते हुए इसमें और वृद्वि करने पर बल दिया।
द्वितीय सत्र में संजय अग्रवाल महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था व प्रफुल्ल कुमार, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस इन्टेलिजेंस द्वारा 60वीं डीजी—आईजी कान्फ्रेंस के मुख्य बिन्दूओं की डीब्रिफिंग की गई जिसमें आईपीएस अधिकारियों को प्रतिवर्ष 100 घन्टे अपने अधीनस्थों को ट्रेनिंग देने की अनिवार्यता पर बल दिया।
ट्रेनिंग में फोरेंसिक व डिजीटल तकनीकों का समावेश करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही सूचना श्रेणियों का टेगिंग एवं एआई आधारित विश्लेषण कर सीमाओं पर निगरानी बढ़ाकर अवैध घुसपैठ रोकने तथा विदेशी पर्यटकों की निगरानी पुलिस समन्वित प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता बताई।
तृतीय सत्र पुलिस थानों के सुदृढीकरण विषय पर आधारित रहा। इसमें श्री रवि जोसेफ लोक्कू अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस बीपीआरएण्डडी, नई दिल्ली द्वारा विस्तार से प्रकाश डालते हुए पुलिस थानों के सुदृढ़ीकरण के लिये विशेष प्रावधान एवं प्रक्रिया पर चर्चा की।
चतुर्थ सत्र में महेश दीक्षित विशिष्ट निदेशक आईबी गृह मन्त्रालय नई दिल्ली द्वारा पुलिस रोडमैप-विजन 2047 विषय पर ऑनलाईन व्याख्यान प्रस्तुत किया। पंचम सत्र काउन्टर टेरेरिज्म परिदृश्य विषय पर आयोजित हुआ। जिसमें विजय सखहरे अतिरिक्त महानिदेशक एनआईए नई दिल्ली द्वारा आतंक विरोधी अभियानों के विभिन्न पहलू एवं रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
वहीं सम्मेलन के दूसरे दिन 9 जनवरी के प्रथम सत्र में पुलिस प्राथमिकताओं में अव्वल महिला सुरक्षा और उसमें प्रौद्योगिकी व तकनीक के प्रयोग विषय पर महत्त्वपूर्ण व्याख्यान होगा। दूसरे सत्र में जन आन्दोलन का मुकाबला- एक पांरिस्थितिकी तन्त्र दृष्टिकोण की आवश्यकता विषय पर व्याख्यान होगा।
तीसरे सत्र में त्वरित अनुसंधान के लिए फोरेन्सिक क्षमता को बेहतर करने तथा एनसीएल की पालना सुनिश्चित करने सम्बन्धी विषय पर गंभीर चर्चा की जाएगी। चौथे सत्र में वर्तमान युवाओं सम्बन्धी एक गम्भीर समस्या तथा चुनौती ड्रग्स व नारकोटिक्स विषय पर इसके निवारण अनुसंधान पुनर्वास तथा जागरूकता विषय पर महत्वपूर्ण चर्चा की जाएगी।
पाँचवे और अंतिम सत्र में वर्तमान परिदृश्य में विभिन्न आपदा उनके प्रबन्धन तथा चुनौतियों से निपटने तथा आगे की राह तय करने की दिशा में परिचर्चा की जाएगी



















