फायर टेक्नीशियन कोर्स के फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने वाली संस्था का निदेशक गिरफ्तार

0
149
The director of the institution that issued fake fire technician course certificates has been arrested.
The director of the institution that issued fake fire technician course certificates has been arrested.

जयपुर। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। एसओजी ने फायर टेक्नीशियन, फायरमैन और लाइब्रेरियन कोर्स की बैक डेट में फर्जी डिग्रियां जारी करने वाली निजी संस्था भारत समाज सेवक (बीएसएस) इंस्टीट्यूट, चेन्नई के निदेशक अरुल ग्नाना मोइसन को गिरफ्तार किया है। आरोपी को एसओजी की टीम चेन्नई से गिरफ्तार कर जयपुर लाई है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि राजस्थान की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं, विशेषकर फायरमैन और लाइब्रेरियन भर्ती में फर्जी डिग्रियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच के दौरान भारत समाज सेवक (बीएसएस) संस्थान संदिग्ध पाया गया। प्रारंभिक स्तर पर पटवारी भर्ती से जुड़ी शिकायतों की भी जांच की गई, लेकिन वहां गड़बड़ी नहीं मिली। इसके बाद जांच का फोकस फायरमैन भर्ती पर किया गया, जहां बीएसएस संस्थान से बैकडेट में डिग्रियां जारी होने के ठोस सबूत सामने आए।

पहले स्थानीय कड़ियां पकड़ीं, फिर चेन्नई तक पहुंची जांच

एसओजी ने पहले एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के आधार पर हिंडौन (करौली) स्थित एएस फायर सेफ्टी इंस्टीट्यूट के संचालक श्यामवीर को गिरफ्तार किया गया। तलाशी में सामने आया कि यह संस्थान बीएसएस से एफिलिएटेड है। इसके बाद एसओजी ने बीएसएस के चेन्नई और दिल्ली स्थित कार्यालयों की तलाशी ली, जहां बड़ी संख्या में बैकडेट में जारी की गई डिग्रियों और प्रमाण-पत्रों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। सबूत जुटाने के बाद कोर्ट से वारंट प्राप्त कर बीएसएस के निदेशक अरुल ग्नाना मोइसन को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया।

यूजीसी या किसी वैधानिक संस्था से मान्यता नहीं

एसओजी के डीआईजी परिस देशमुख ने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि भारत समाज सेवक (बीएसएस) संस्थान को यूजीसी या किसी भी वैधानिक संस्था से कोई मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद यह संस्थान वॉकेशनल कोर्स के नाम पर फायरमैन, फायर टेक्नीशियन, लाइब्रेरियन सहित कई कोर्सेज की डिग्रियां जारी कर रहा था।

फ्रेंचाइजी और दलालों का देशव्यापी नेटवर्क

जांच में सामने आया कि बीएसएस ने फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करते हुए देशभर में अपने नेटवर्क का विस्तार किया। संस्था से करीब 10 हजार इंस्टीट्यूट जुड़े, जिनमें से लगभग 7 हजार अभी सक्रिय हैं। इन संस्थानों और दलालों के माध्यम से हजार से अधिक कोर्सेज की डिग्रियां ऑन-डिमांड जारी की जाती थीं।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि हर इंस्टीट्यूट का एक दलाल होता था, जो अभ्यर्थियों को झांसे में लेकर उनकी जानकारी बीएसएस कार्यालय भेजता था। इसके बाद मांगी गई तारीख के अनुसार बैक डेट में डिग्री और प्रमाण-पत्र जारी कर दिए जाते थे।

पूछताछ में और खुलासों की उम्मीद

एसओजी अधिकारियों के अनुसार आरोपी से पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। एसओजी ने आमजन और नियोजक संस्थाओं से अपील की है कि किसी भी डिग्री या प्रमाण-पत्र के आधार पर चयन से पहले उसका पूर्ण और विधिवत सत्यापन अवश्य करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here